सिंचाई के पानी की चोरी के विरोध में प्रदर्शन

31 दिसम्बर, 2018 को राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर के किसानों ने मज़दूर किसान व्यापारी संघर्ष समिति की अगुवाई में, उपखंड कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया।

इससे पूर्व, बड़बिराना, सोती, रामगढ़, परलीका, ढाणी अराईयान, खचवाना, नेठराना आदि गांवों के किसान भगतसिंह चैक पर एकत्र हुए। यहां से किसान रैली के रूप में जल संसाधन विभाग व प्रशासन के खि़लाफ़ नारेबाजी करते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचे,  जहां रैली सभा में तब्दील हो गयी।

सभा को संबोधित करते हुए किसानों ने कहा कि प्रशासन सिंचाई के पानी की चोरी पर अंकुश लगाने में विफल रहा है। किसानों ने आंदोलन को तेज़ करने की चेतावनी दी। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासन को सिंचाई के पानी की चोरी करने वाले किसानों की पूरी जानकारी है। लेकिन सिर्फ आंदोलन के समय सिंचाई के पानी के चोरों पर कार्रवाई की नौटंकी करके रस्म अदायगी कर ली जाती है। निरंतर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है। क्षेत्र में अनेक स्थानों पर मोघों का आकार निर्धारित साइज से बड़ा है। इसकी वजह से कुछ जगहों पर पानी ज्यादा मिलता है जबकि कहीं पर कम। लेकिन जल संसाधन विभाग राजनीतिक दबाव में आकर, कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

इसके बाद किसानों की एस.डी.एम. सैय्यद शिराज़ अली जै़दी से वार्ता हुई। इसमें सिंचाई की समस्याओं को शीघ्र हल करने का आश्वासन दिया गया। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को तीन सूत्री मांग पत्र दिया गया, जिसमें अमरसिंह ब्रांच में निर्धारित सिंचाई पानी देकर, पन्द्रह दिन चलाकर, सात दिन बंदी का रेग्यूलेशन तय करने, मोघों का साइज ठीक करने व सिंचाई के पानी की चोरी रोकने के लिए प्रभावी क़दम उठाने की मांग की गई।

इस मौके पर लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा, मज़दूर किसान व्यापारी सघर्ष समिति के अध्यक्ष मदनलाल बेनीवाल, पूर्व सरपंच ओम सहू तथा लक्ष्मीनारायण बेनीवाल, कालूराम बैरड़, जुगलाल खाती, हेतराम बेनीवाल, शिवकुमार सिहाग, सिकंदर अराई, मुंशीराम जाट, कुंभाराम नेठराना, आशाराम वर्मा, रामकरण साहू, भगतराम खचवाना, आदि मौजूद रहे।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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