बिहार मिड डे मील कर्मियों द्वारा मुख्यमंत्री का घेराव

बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर बिहार के सभी जिलों के विद्यालयों के हजारों महिला मिड डे मील (एम.डी.एम.) रसोइय गत 7 जनवरी से लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसी क्रम में उन्होंने 23 और 24 जनवरी, 2019 को पटना में मुख्यमंत्री के आवास पर महापड़ाव किया। अखबार के प्रेस में जाने तक यह हड़ताल जारी है।

मिड डे मील रसोइयों की प्रमुख मांगें हैं:

  1. एम.डी.एम. रसोइया का पारिश्रमिक तत्काल बढ़ाया जाये और न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाये,
  2. सभी रसोइया को नियुक्ति पत्र, चयन पत्र निर्गत करने एवं गृह विहिन रसोइया को इंदिरा आवास की सुविधा दिलाई जाये।
  3. सेवा निवृति की उम्र 65 वर्ष निर्धारित की जाये,
  4. सभी विद्यालयों में समुचित ढांचागत विकास करके खाना बनाने के लिये शेड बनाया जाये, भंडार स्थल बनाया जाये और साफ पेयजल की आपूर्ति की जाये,
  5. रसोइया को साल में दो सेट वर्दी एवं सफाई भत्ता का भुगतान किया जाये,
  6. विभाग निर्देशों का उल्लंघन करके मनमाने ढंग से काम से हटाए गए सभी रसोइयों को पुनः कार्य पर वापस लिया जाये
  7. ज़मीन के अभाव में भवन विहीन विद्यालयों का अन्य प्रारंभिक विद्यालयों में विलय होने पर शिक्षक के साथ एम.डी.एम. रसोइया का भी समायोजन सुनिश्चित किया जायेे,

गौरतलब है कि बीते 19 नवंबर को देशभर के रसोइया संगठन दिल्ली में मोदी सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखने पहुंचे थे। लेकिन, सरकार ने उनकी मांगों पर विशेष ध्यान नहीं दिया।

समाचारों से पता चला है कि पूरे बिहार में सभी जिलों के मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किये गये। कई जगहों पर जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पुतले फूंके गये। सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन लगातार जारी हैं।

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Feb 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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