भारतीय रेल के रेल चालकों का प्रदर्शन

चार हज़ार से अधिक भारतीय रेल के रेल चालकों ने, अपने परिजनों सहित, 18 फरवरी को नई दिल्ली के रानी झांसी रोड पर स्थित अम्बेडकर भवन से जंतर-मंतर तक विरोध प्रदर्शन किया। आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) की अगुवाई में, रेल चालकों की लंबित मांगों को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था।

AILRSA Convention 2019
AILRSA Rally

जंतर-मंतर पर आंदोलित रेल चालकों की एक विशाल जनसभा हुई। 17 रेलवे ज़ोनांे के 68 विभागों से रेल चालकों ने जनसभा में भाग लिया।

जनसभा का उद्घाटन सीटू के महासचिव का. तपन सेन ने किया। ए.आई.एल.आर.एस.ए. के महासचिव का. एम.एन. प्रसाद, एन.एफ.आई.आर. के महासचिव श्री राघवैया, एन.एफ.पी.ई. से गिरीराज सिंह, के.सी. जेम्स, सी.के. सरकार, एम.पी. देव, के.ए.एस. मनी, रामसरन, ए.के. रूते, का. डी.एस. कोपरकर तथा अन्य नेताओं ने विशाल जनसभा को संबोधित किया।

का. एम.एन. प्रसाद तथा अन्य वक्ताओं ने आंदोलन की मुख्य मांगों पर विस्तारपूर्वक बात रखी। उन्होंने समझाया कि हालांकि सातवें वेतना आयोग के निर्देशों के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने वेतन के 30 प्रतिशत रनिंग एलावेंस और टीए का प्रस्ताव परित कर दिया है, परन्तु वित्त विभाग इसे लागू करने में देर कर रहा है। भारतीय रेल के चालकों को बार-बार रेलवे प्रशासन के सामने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना पड़ा है। आज भी साप्ताहिक अवकाश, लगातार 2 नाईट ड्यूटी की सीमा, ग्रेड पे, पारिवारिक और सामाजिक ज़रूरतों के लिये अवकाश, आदि की मांगों को लेकर रेल चालक दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

जनसभा में उठाई गई मुख्य मांगें थी - निर्धारित रनिंग अलावेंस दिया जाये, 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वर्तमान सेवानिवृत्त कर्मचारियों के समान पेंशन दिया जाये, नई पेंशन योजना को वापस लिया जाये और पूर्व पेंशन योजना को जारी रखा जाये, एच.पी.सी. व सुरक्षा समिति की अन्य सिफारिशें लागू की जायें तथा रेलवे के निजीकरण को रोका जाये।

सभा को संबोधित करने वाले नेताओं ने ऐलान किया कि अगर 31 मार्च तक निर्धारित रनिंग अलावेंस नहीं दिया जाता है और बाकी सारी मुख्य मांगों पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है तो रेल रोको आंदोलन किसी भी समय पर शुरू किया जायेगा।

Tag:   

Share Everywhere

Mar 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)