आंगनवाड़ी मज़दूरों ने राजधानी में किया प्रदर्शन

हज़ारों आंगनवाड़ी मज़दूरों ने दूर-दूर से आकर अपनी मांगों को बुलंद करने के लिये 24 फरवरी को दिल्ली में प्रदर्शन किया।

Anganwadi protest action
Anganwadi protest action

अपने-अपने इलाकों से लिये हस्ताक्षरों की पोटलियों को अपने सर पर रखे और हाथों में हाथ लिये, उन्होंने मंडी हाउस से संसद मार्ग तक जुलूस निकाला। वे पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश तथा अन्य राज्यों से आयी थीं। प्रदर्शन करने वाली आंगनवाड़ी मज़दूरों ने उनके साथ होने वाले अन्यायपूर्ण बर्ताव और सरकार द्वारा समेकित बाल विकास सेवा (आई.सी.डी.एस.) के निजीकरण के खि़लाफ़ नारे लगायेे।

इन महिलाओं के गहरे रोश को प्रकट करते हुए, हिमाचल प्रदेश से आयी एक आंगवाडी मज़दूर ने अपने शब्दों में कहा, ”बच्चों के पोषण और उनको पहले शब्द कहना सिखाने वाले, हम, इस देश के निर्माणकर्ता हैं, फिर भी हमारा वेतन सबसे कम है। मैं सरकार से पूछना चाहती हूं कि हमारे साथ ऐसा अन्यायपूर्ण बर्ताव क्यों होता है? हम प्रतिदिन आठ घंटे से भी ज्यादा काम करते हैं तब भी हमें इतना कम वेतन दिया जाता है।“

आंगनवाड़ी मज़दूरों की अनेक जिम्मेदारियां होती हैं जिनमें चुनावी सर्वेक्षण व ब्लाक स्तर के कार्यों के साथ और भी काम शामिल हैं जबकि उनको नाममात्र का वेतन मिलता है। ये मज़दूर अपने काम के लिये ठीक वेतन की मांग करते आये हैं और दशकों से सरकार द्वारा दिये जाने वाले ”मानदेय“ को वे अब नकारते हैं। 34 वर्षों से काम करने वाली एक आंगनवाड़ी मज़दूर को अब 4000 रुपये मासिक मिलता है जबकि उसने 170 रुपये मासिक वेतन पर काम शुरू किया था!

अक्तूबर में दिवाली के वक्त, मोदी सरकार ने उनके वेतन में बढ़ोतरी करने का आश्वासन दिया था, परन्तु ज़मीनी तौर पर कुछ नहीं किया गया है। झूठे वायदे करने के इस दौर में, सरकार ने मार्च में घोषणा की थी कि आंगनवाड़ी मज़दूरों और सहायकों के न्यूनतम वेतन बढ़ाये जायेंगे, परन्तु इसको पूरा करने के लिये इस महीने प्रस्तुत अंतरिम बजट में कोई ठोस क़दम नहीं लिया गया है, जिसकी वजह से मज़दूरों को फिर सड़कों पर उतरना पड़ा है।

मज़दूरों की मांग है कि उन्हें नियमित वेतन व पेंशन मिलनी चाहिये, तथा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण, कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिये। उनकी अन्य मांगों में शामिल है कि, आंगनवाड़ी कर्मी या सहायक की मृत्यु होने पर अनुकंपा राशि तीन लाख रुपये मिलनी चाहिये। आंगनवाड़ी मज़दूर यह भी मांग कर रहे हैं कि सहायक से मज़दूर और मज़दूर से सुपरवाइज़र की पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर होनी चाहिये। साथ ही वे मांग कर रहीं हैं कि पहले बंद की गयीं बालवाड़ियों को फिर से शुरू करना चाहिये और मज़दूरों व सहायकों को नौकरी पर लेना चाहिये।

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Mar 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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