शिक्षा के निजीकरण के खि़लाफ़ व रोज़गार के लिये संघर्ष

18 फरवरी, 2019 को 5,000 से भी अधिक छात्रों ने रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक जुलूस निकाला, जिसमें नौकरियों के लिये और शिक्षा के निजीकरण के खि़लाफ़ मांगें उठाई गयीं।

Young India Adhikar Rally Feb 2019

जुलूस में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, त्रिपुरा और अन्य राज्यों से छात्रों और नौजवानों ने भाग लिया। इसमें भाग लेने वाले संगठनों में स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एस.एफ.आई.), आॅल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (ए.आई.डी.एस.ओ.), प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स यूनियन (पी.एस.यू.), आॅल इंडिया स्टूडेंट्स ब्लाक (ए.आई.एस.बी.) और आॅल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (ए.आई.एस.एफ.) शामिल थे।

छात्रों ने ध्यान दिलाया कि राज्य शिक्षा पर खर्च को कम कर रहा है और शिक्षा के निजीकरण को जोर-शोर से आगे बढ़ा रहा है। इससे फीसों में बढ़ोतरी हुई है और निजी शिक्षा संस्थानों और महंगे पाठ्यक्रमों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से श्रमिक वर्ग के परिवारों के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

छात्रों ने अपना आठ-सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया जिसमें के.जी. से पी.जी. तक निःशुल्क व समान शिक्षा, बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर, आरक्षण को लागू करना, पिछड़े वर्गों के शोध छात्रों की सभी बकाया स्काॅलरशिव व फेलोशिप को जारी करना, सभी के लिये नौकरियों की गारंटी और महिलाओं की सुरक्षा, इत्यादि शामिल हैं।

इसके पहले, 7 फरवरी को देश के विभिन्न इलाकों से सैंकडों नौजवानों और छात्रों ने दिल्ली के लाल किले से जंतर-मंतर तक, ”यंग इंडिया अधिकार मंच“ के तहत जुलूस निकाला था। उन्होंने बढ़ती बेरोज़गारी और मौजूदा सरकार की नौजवानों के प्रति वादों को पूरा करने में विफलता का विरोध किया था। उन्होंने मांग की थी कि सभी को शिक्षा और नौकरी की गारंटी होनी चाहिये।

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Mar 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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