दिल्ली में गेस्ट टीचरों का धरना

दिल्ली के सैकड़ों गेस्ट टीचर अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस सिलसिले में 4-7 मार्च के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल के यहां धरना दिया है। इससे पूर्व, 1-3 मार्च को उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री के आवास पर धरना दिया।

Guest teachers dharna

विदित रहे कि पूर्व के वर्षों में गेस्ट टीचर्स का कॉन्ट्रैक्ट मई 10 तक चलता रहा है परंतु इस बार गेस्ट टीचर्स की सेवा फरवरी मे ही समाप्त कर दी गयी और गेस्ट टीचर्स का रिन्यूअल भी नही हुआ, जिस कारण लगभग 25000 गेस्ट टीचर्स बेरोज़गार हो गए हैं।

सक्रिय आंदोलनकारी गेस्ट टीचर, डा. रचना ने मज़दूर एकता लहर को बताया कि 2017 में दिल्ली सरकार में विधानसभा में गेस्ट टीचरों को स्थाई करने तथा संवर्धित वेतनमान देने के संबंध में एक बिल पेश किया था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दिल्ली सरकार ने बीते 4 सालों से गेस्ट टीचरों को स्थाई करने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है। इसीलिये 2009 से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कार्यरत हजारों गेस्ट टीचर धरना देने पर मजबूर हो गये हैं। उनकी मांग है कि उनके लिये 60 वर्ष की उम्र तक स्थायी नौकरी सुनिश्चित की जाए।

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Mar 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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