महिलाओं ने शोषण व अन्याय से मुक्त नए समाज के लिए प्रदर्शन किया

लगभग 20 अलग-अलग संगठनों से सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और नौजवानों, बड़ी संख्या में शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, वकीलों और अलग-अलग क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, नई दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने-अपने संगठनों के बैनरों के साथ जुलूस निकाला। अपनी मांगों के नारों से सुसज्जित बैनरों और प्लाकार्डों को हाथों में लिए, सभी कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित तरीके से प्रस्थान किया।

IWD-2019 march New Delhi

सहभागी संगठन थे एक्शन इंडिया, एडवा, एपवा, आज़ाद फाउंडेशन, बी.डी.एस. इंडिया, सी.बी.सी.आई., कौंसिल फॉर वीमेन, सी.एस.डब्ल्यू., जागोरी, जे.डब्ल्यू.पी., एन.एफ.आई.डब्ल्यू., एन.एन.एस.डब्ल्यू., नज़रिया, निरंतर, पुरोगामी महिला संगठन, सहेली और स्वास्तिक महिला समिति।

प्रदर्शन के दौरान, सभी सहभागियों ने अपने उद्धार के संघर्ष को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को प्रकट करते हुए, जोश के साथ नारे लगाए। महिलाओं का शोषण-दमन मुर्दाबाद!”, “महिलाओं पर अन्याय नहीं सहेंगे, नहीं सहेंगे!, “हर हाथ को काम दो, काम का सही दाम दो!”, “शोषण-दमन ख़त्म करेंगे, नया समाज बनायेंगे!”, “शासन सत्ता अपने हाथ, जुल्म-अन्याय करें समाप्त!” - इस प्रकार के अनेक नारों से सड़कें गूंज उठीं।

जंतर-मंतर पर एक जनसभा हुयी, जिसमें सभी सहभागी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सभा को संबोधित किया। कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने नाटकों के माध्यम से महिलाओं के साथ भेदभाव और महिला मुक्ति के संघर्ष को बहुत ही संवेदनशील तरीके से दर्शाया। कुछ और संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपने जोश-भरे गीतों से सभी को संघर्ष करने को प्रेरित किया।

वक्ताओं ने महिलाओं और पुरुषों की रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा की। एक के बाद दूसरी सरकार द्वारा लागू की जा रही निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण की नीतियों की सख्त भत्र्सना की। इन नीतियों की वजह से अमीरों और ग़रीबों के बीच की खाई दिन--दिन और चैड़ी होती जा रही है, उन्होंने समझाया। बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हाथों में सारा धन संकेंद्रित हो रहा है। पूरी अर्थव्यवस्था देशी-विदेशी इजारेदार पूंजीवादी घरानों के अधिकतम मुनाफ़ों की लालच को पूरा करने की दिशा में चलायी जा रही है, न कि लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए।

संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि शासक वर्ग के नेता बड़े सुनियोजित तरीके से नफ़रत, अराजकता और हिंसा फैला रहे हैं। राज्य प्रशासन के समर्थन के साथ, खास समुदायों और लोगों को निशाना बनाकर हिंसक हमले करने के लिए गुंडों को उकसाया जा रहा है। अधिकारियों की सांठ-गांठ में और कॉर्पोरेट मीडिया से प्रेरित, देश के अलग-अलग भागों में, हाल में, कश्मीरी नौजवानों और लोगों के खि़लाफ़ फैलाई गयी हिंसा की कड़ी आलोचना की गयी। सभी प्रतिनिधियों ने राजकीय आतंकवाद की निंदा की। अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे लोगों को राष्ट्र-विरोधी”, “आतंकवादी”, “अर्बन नक्सल”, आदि बताकर उनका उत्पीड़न करने के राज्य के क़दमों की सख्त आलोचना की गयी।

महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने हमारे शासकों द्वारा आजकल बड़े जोर-शोर से किये जा रहे जंग के प्रचार पर घोर चिंता प्रकट की। सबके दिलों की बात जो सामने आई, वह थी कि हमारे शासक जंग के ढोल पीटकर हमें अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों के संघर्ष से भटकाना चाहते हैं। हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे। जंग से सिर्फ मौत और तबाही फैलती है, इस पर जोर देते हुए, वक्ताओं ने हिन्दोस्तान और पाकिस्तान की सरकारों से मांग की कि सभी विवादास्पद मुद्दों को बातचीत के ज़रिये हल किया जाए। उन्होंने सभी को आह्वान दिया कि दक्षिण एशिया में शांति के लिए सक्रियता से प्रचार करें।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2019 को आयोजित किये गये इस प्रदर्शन और जन सभा में हमारी शोषित बहनों और भाइयों के उस नए समाज के जजबातों की झलक थी, जिसमें कोई शोषण-दमन नहीं होगा और हम खुद अपने भविष्य के मालिक होंगे तथा हमारे सारे अधिकार सुनिश्चित होंगे।

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Mar 16-31 2019    Struggle for Rights    Popular Movements     Rights     War & Peace     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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