वेदांता प्लांट में हिंसक झड़पों में 2 लोगों की मौत

मीडिया में आ रही रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा के कालाहांडी जिले में वेदांता के प्लांट के बाहर 18 मार्च, 2018 को हुई हिंसक घटना में दो लोगों की मौत हो गयी। इसमें से एक व्यक्ति ओडिशा इंडस्ट्रियल सिक्युरिटी फोर्स का जवान था। 30 अन्य लोग भी इस घटना में घायल हुए हैं।

वेदांता के ऑफिस के बाहर लगभग 500 आदिवासी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जब राज्य के ओडिशा इंडस्ट्रियल सिक्युरिटी फोर्स के जवानों ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला कर दिया। उन पर शारीरिक हमला किया गया। प्रदर्शनकारियों में आप-पास के तीन गांवों के लोग थे जिन्होंने वेदांता प्लांट को अपनी ज़मीन दी थी और अब उम्मीद कर रहे थे कि वेदांता कंपनी स्थानीय लोगों के लिए नौकरी देगी और पास ही लंजीगढ़ गांव में वेदांता द्वारा चलाये जा रहे स्कूल में उनके बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा का इंतजाम करेगी।

2004 में वेदांता एलुमिना कंपनी ने रंगोपली, पोटागड़ा, बुंदेल, बंधूगुड़ा और अन्य गांवों की लगभग 3,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था और इसके बदले में स्थानीय लोगों को नौकरी देने का वादा किया था। कंपनी के अधिकारियों ने गांव के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा देने का भी वादा किया था। लेकिन कंपनी ने अभी तक किसी भी वायदे को पूरा नहीं किया है।

प्लांट के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों में कंपनी के मज़दूर भी थे जो एक स्थानीय मज़दूर को कंपनी से बर्खास्त किये जाने के खि़लाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे।

ओडिशा के वेदांता प्लांट के सामने हुई यह घटना तमिलनाडु में वेदांता कॉपर स्मेल्टर प्लांट के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुई पुलिस की गोलीबार की घटना के 10 महीने बाद हो रही है। तमिलनाडु की उस घटना में 13 लोगों की जानें गयी थीं।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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