चेन्नई में मई दिवस पर सभाएं

तमिलनाडु में पुलिस द्वारा चुनाव का बहाना देकर मई दिवस का कोई भी कार्यक्रम आयोजित किये जाने पर रोक लगाने के बावजूद सैकड़ों मज़दूरों ने तमिलनाडु में जगह-जगह अपनी ट्रेड यूनियनों की अगुवाई में अपनी फैक्ट्रियों और अपनी काम की जगहों पर लड़ाकू रैलीयां आयोजित कीं। वी.एच.एस अस्पताल (अद्यार) में, चेन्नई एयरपोर्ट पर एयर कारपोरेशन एम्प्लाइज यूनियन (ए.सी.ई.यू.) और एयर इंडिया एम्प्लाइज यूनियन के सदस्यों द्वारा, भद्रा कार्गो काम्प्लेक्स पर भद्रा वर्कर्स यूनियन के मज़दूरों द्वारा और, केंटनमेंट बोर्ड एम्प्लाइज यूनियन के मज़दूरों द्वारा संत थॉमस माउंट पर स्थित केंटनमेंट बोर्ड ऑफिस के कर्मचारियों द्वारा गेट मीटिंग आयोजित की गयी।

Chennai Madyday

मई दिवस को शाम के समय अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों और उद्योगों के मज़दूरों ने संयुक्त जुलूस आयोजित किये। हाथों में लाल झंडा और बैनर उठाये हजारों मज़दूरों ने इन जुलूसों में हिस्सा लिया और अपनी मांगों को बुलंद किया। जुलूस के दौरान मज़दूरों ने मई दिवस ज़िंदाबाद और मज़दूर एकता ज़िंदाबाद के नारे लगाते हुए सरकार और पूंजीवादी पार्टियों की मज़दूर विरोधी नीतियों और मज़दूरों पर हो रहे हमलों की निंदा की। जुलूस के अंत में जन-सभाएं आयोजित की गयीं।

जन-सभाओं में सभी वक्ताओं ने मज़दूरों की एकता को मजबूत करने और शोषण का विरोध करने की ज़रूरत पर जोर दिया। सभा का अंत मज़दूरों के लड़ाकू नारों के साथ हुआ।

वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के प्रतिनिधि ने कई गेट मीटिंगों और रैलियों में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि आज अधिकांश मज़दूरों को बुनियादी अधिकारों से रोज़गार की सुरक्षा के अधिकार से, अपनी पसंद की यूनियन बनाने का अधिकार से और बढ़ती महंगाई के अनुसार वेतन में बढ़ोतरी, इत्यादि से वंचित रखा जाता है। मज़दूरों के शोषण को और अधिक तीव्र करने और उनके अधिकारों में कटौती करने के लिए सरकार ने मज़दूर कानूनों में कई संशोधन किये हैं। यह एक हक़ीक़त है कि पिछले 70 वर्षों में जो भी पार्टी सत्ता में आई उसने केवल बड़े पूंजीपतियों की ही सेवा की है। वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के प्रतिनिधि ने सवाल उठाया कि हम मज़दूर इस भ्रम में क्यों रहे कि बड़े पूंजीपतियों की पार्टियां हमारी मांगों को पूरा करेंगी? हम मज़दूर देश की तमाम दौलत को पैदा करते हैं, फिर हम क्यों न खुद देश के हुक्मरान बनकर समाज से शोषण और दमन को ख़त्म करें और एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सभी मेहनतकश लोगों के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी? आओ हम सब मिलकर इस मई दिवस के अवसर पर ऐसे तरीके इजाद करें जिससे सभी मेहनतकश लोग असली मायने में इस देश के मालिक बनेंगे।

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चेन्नई में मई दिवस    May 16-31 2019    Struggle for Rights    History    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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