ईरान पर अमरीका का दबाव बढ़ता जा रहा है, और ईरान का प्रतिरोध भी

ईरान पर अमरीका का सैनिक और आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ईरान के राज्य और लोग अपने देश के हितों की हिफाजत में, बहादुरी से इन दबावों का विरोध कर रहे हैं। अमरीका का रवैया दिन-ब-दिन और घमंडी व जंगफरोश होता जा रहा है।

अमरीकी साम्राज्यवादी लगातार कान फोड़ने वाला प्रचार करते रहते हैं कि ईरान दक्षिण एशिया में शांति के लिए मुख्य ख़तरा है और “दुनिया में आतंकवाद का मुख्य प्रश्रयकर्ता” है। इस झूठे प्रचार के जरिये, अमरीकी साम्राज्यवादी उस इलाके में अपनी विशाल सैनिक उपस्थिति, ईरान के खिलाफ़ उनकी धमकियों और प्रतिबंधों तथा ईरान में शासन परिवर्तन करने की उनकी कोशिशों को जायज ठहराते हैं।

अमरीका उस इलाके में अपनी सैनिक उपस्थिति को और बढ़ाता जा रहा है। उसने ईरान के कंप्यूटर नेटवर्क और मिसाइल सिस्टम पर साइबर हमले किये हैं। बीते हफ्तों में, अमरीका ने, उस इलाके में अपने मित्रों, सऊदी अरब और इस्राइल के सहारे, ईरान के खिलाफ़ कई भड़काऊ हरकतें की हैं।

19 जून को, जब जापानी प्रधानमंत्री ईरान के नेताओं के साथ इस संकट से सम्बंधित बातचीत करने के लिए तेहरान में मौजूद थे, तो ठीक उसी समय होरमुज जल संयोगी और फारस की खाड़ी में दो तेल वाहक टैंकर बम से उड़ा दिए गए। इनमें से एक जापानी टैंकर था, जो जापान को तेल ले जा रहा था। अमरीका ने फौरन ऐलान कर दिया कि ईरान के एजेंटों ने पानी के नीचे लिम्पेट सुरंग रखकर उन टैंकरों को नष्ट किया था। परन्तु उन टैंकरों पर हमलों के लिए ईरान को दोषी ठहराने की अमरीका की कोशिश का पूरा पर्दाफाश हो गया और वह इल्जाम सरासर झूठा साबित हुआ, जब जापानी जहाज के कप्तान ने बताया कि उनके जहाज पर हवाई हमला हुआ था, समुद्री नहीं। ईरान के अधिकारियों ने अमरीकी साम्राज्यवादियों के इन दावों का खंडन किया है और टैंकरों पर हमलों के लिए अमरीका व उसके मित्रों को दोषी ठहराया है। वे ईरान के संप्रभु हकों की हिफ़ाज़त करते हुए, अमरीका की जंग की धमकी का मुकाबला करने के लिए अपनी सैनिक तैयारी को और मजबूत कर रहे हैं तथा अमरीकी अधिकारियों के घमंड व झूठे प्रचार का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। ईरान ने ऐलान किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को और विकसित करेगा, क्योंकि वह अब 2015 के परमाणु समझौते की शर्तों से बंधा हुआ नहीं है। विदित है कि उस समझौते के तहत, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाया गया था, जिसके बदले में ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था। पर मई 2018 में अमरीका ने खुद ही उस समझौते को ख़ारिज कर दिया था।

20 जून को ईरान के सैनिक कमांडरों ने उनकी उड़ान सीमा का उल्लंघन करने वाले एक अमरीकी खुफिया ड्रोन को मिसाइल से मारकर गिरा दिया। उन्होंने घोषणा कर दी कि उनकी नज़र में आस-पास का एक और अमरीका वायु सेना का विमान भी था, जिस पर उन्होंने गोली नहीं चलायी थी क्योंकि उसमें 35 विमान कर्मी थे। ईरान की जलसेना के कमांडरों ने चेतावनी दे दी है कि अगर कोई और अमरीकी खुफिया ड्रोन उनकी उड़ान सीमा के अन्दर प्रवेश करता है तो उसे भी मार गिराया जायेगा।

24 जून को अमरीका के राष्ट्रपति, ट्रम्प ने ईरान पर “कठोर प्रतिबन्ध” लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किया। इन प्रतिबंधों से ईरान के उच्च नेताओं और अफसरों को अमरीकी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ काम-काज करने से रोका जायेगा। इससे पहले ही, बीते वर्ष के दौरान, अमरीका ने ईरान पर ढेर सारे प्रतिबन्ध लगा रखे हैं, जिनकी वजह से उस देश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हो रहा है। इन प्रतिबंधों के जरिये, ईरान को अपना तेल दूसरे देशों को बेचने से रोका जा रहा है। ईरान ने इसे “आर्थिक आतंकवाद” बताकर, इसकी कड़ी निंदा की है।

अमरीकी खुफिया ड्रोन के गिराए जाने के बाद, अमरीका के राष्ट्रपति ने एक धमाकेदार घोषणा की, कि उन्होंने ईरान पर प्रतिघाती हमलों का आदेश दिया, लेकिन अंतिम क्षण पर उस आदेश को वापस लिया गया। अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने फौरन चेतावनी दी कि इसे अमरीका की ‘कमजोरी’ नहीं समझनी चाहिए। बहरहाल, ट्रम्प ने कहा है कि अगर ईरान के नेता “आतंकवाद को प्रश्रय देना बंद कर देते हैं”, तो वे उनके साथ बातचीत करने को तैयार हैं। साथ ही साथ, ट्रम्प ने धमकी दी है कि अगर ईरान के नेता अमरीका की मांगों को नहीं मानते हैं तो उसका बहुत बुरा हश्र होगा। संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के दूत ने कहा है कि बढ़ते प्रतिबंधों और धमकियों के चलते, अमरीका के साथ ईरान का बातचीत करना असम्भव है।

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हाल में मध्य पूर्व क्षेत्र का दौरा किया और 24 जून को सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमिरात के नेताओं के साथ बातचीत की। उन्होंने एशियाई और यूरोपीय देशों समेत, एक व्यापक, विश्वव्यापी, ईरान-विरोधी गठबंधन बनाने की अमरीका की योजना का विवरण दिया। उन्होंने यह भी मांग की कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात और अमरीका के दूसरे मित्र देश फारस की खाड़ी में अमरीकी फौज़ों को तैनात करने के खर्चे का बोझ उठाएं।

अमरीका अपने मित्र देशों - जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन - पर बहुत दबाव डाल रहा है कि ईरान के साथ किये गए परमाणु समझौते से हट जाएं और ईरान को अलग-थलग करके उसे नष्ट करने में अमरीका का साथ दें। लेकिन इन देशों में से कोई भी अब तक इससे सहमत नहीं हुआ है। रूस और चीन ने ईरान के साथ समझौते से हट जाने और ईरान पर नाजायज प्रतिबन्ध लगाने के लिए, अमरीका की कड़ी निंदा की है। जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस ने चेताया है कि इन कदमों की वजह से अमरीका और ईरान के बीच सैनिक टक्कर हो सकते हैं।

उपरोक्त गतिविधियों से स्पष्ट होता है कि अमरीकी साम्राज्यवादी ईरान को तबाह करने के अपने उद्देश्य पर डटे हुए हैं। अमरीकी साम्राज्यवादी तेल-समृद्ध मध्य पूर्व क्षेत्र पर अपना सम्पूर्ण प्रभुत्व जमाने के रास्ते में ईरान को एक रुकावट मानते हैं। वे अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी आर्थिक और सैनिक ताक़त और झूठे प्रचार के तमाम माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। परन्तु ईरान के लोग बहादुरी से अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहे हैं और इन झूठे प्रचारों का खंडन कर रहे हैं। अमरीका अपनी हुक्मशाही के तले, एक-ध्रुवीय दुनिया स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसीलिये वह ईरान पर हमले कर रहा है। परन्तु दुनिया भर के शांति पसंद और आज़ादी पसंद लोग इसका विरोध कर रहे हैं। कई दूसरी ताक़तें जो अमरीकी हुक्मशाही को स्वीकार नहीं करती हैं और अपने हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रही हैं, वे भी अमरीकी साम्राज्यवादियों के इन कदमों का विरोध कर रही हैं।

ईरान के खिलाफ़ अमरीका की भड़काऊ हरकतें मध्य पूर्व क्षेत्र में जंग के खतरे को खूब बढ़ा रही हैं और अनेक राष्ट्रों व लोगों की संप्रभुता को खतरे में डाल रही हैं।

Tag:   

Share Everywhere

अमरीका का दबाव    ईरान का प्रतिरोध    Jul 1-15 2019    World/Geopolitics    Rights     War & Peace     2019   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)