नफ़रत की राजनीति के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

23 जुलाई, 2019 को नफ़रत की राजनीति बंद किए जाने और गुनहगारों को सख्त सज़ा दिये जाने की मांग को लेकर वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया की दिल्ली राज्य कमेटी की अगुवाई में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया। इसमें लोक राज संगठन और राष्ट्रीय जन क्रांति मंच ने भी भाग लिया।

विदित है कि पूरे देश में, हुक्मरान वर्ग बड़ी सरगर्मी के साथ लोगों के बीच नफ़रत और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। खासकर, मुस्लिम धर्म के लोगों को गौ-रक्षा या धार्मिक नारों की आड़ में गुंडों की भीड़ निशाना बना रही है।

23Jul dharna_WPI

इस प्रदर्शन को सहभागी संगठनों के प्रतिनिधियों, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया से डा. एस.क्यू.आर. इल्यास, सिराज़ तालिब, मो. आरिफ अखलाक़, अहसान फिरोजाबादी और मिस्कत हाशमी, लोक राज संगठन की ओर से बिरजू नायक और राष्ट्रीय जन क्रांति मंच की ओर से बलवीर सिंह ने संबोधित किया।

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नफ़रत    राजनीति    प्रदर्शन    Aug 1-15 2019    Struggle for Rights    Communalism     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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