यू.ए.पी.ए. संशोधन विधेयक : प्रतिरोध की आवाज़ को कुचलने के लिये एक कठोर संशोध

यू.ए.पी.ए. संशोधन विधेयक को 24 जून को लोकसभा में पेश किया गया। अगर यह कानून बन जाता है तो सरकार को पूरा अधिकार होगा कि किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी करार दिया जाये। इसके लिये कोई औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया की ज़रूरत नहीं होगी और सरकार के दावे को जायज़ ठहराने के लिये कोई सबूत पेश करने की ज़रूरत नहीं होगी। आतंकवादी करार किये गये व्यक्ति के नाम को चैथी अनुसूची में डाल दिया जायेगा और उस अनुसूची को यू.ए.पी.ए. में जोड़ने का प्रस्ताव है। उस व्यक्ति के पास इससे निकलने के लिये एक ही कानूनी रास्ता होगा, कि वह केन्द्र सरकार को अर्जी दे कि उसके नाम को सूची से हटाया जाये। उसकी अर्जी पर एक जांच कमेटी विचार करेगी, जिसका गठन सरकार खुद ही करेगी!

किस प्रकार के व्यक्ति को सरकार आतंकवादी घोषित करेगी? गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि “जो व्यक्ति आतंकवादी हरकतें करता है, उसे आतंकवादी करार दिया जायेगा। जो भी आतंकवादी हरकत की तैयारी करता है या उसे प्रोत्साहित करता है या उसके लिये धन जुटाता है, उसे आतंकवादी करार दिया जायेगा”।

मौजूदा यू.ए.पी.ए. में किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान पहले से ही है। जो व्यक्ति इस प्रकार के संगठन का समर्थक या सदस्य है या उस संगठन को धन देता है, उसे मौजूदा यू.ए.पी.ए. के प्रावधानों के तहत सज़ा दी जा सकती है।

तो फिर खास व्यक्तियों को आतंकवादी करार देने के पीछे सरकार का क्या मकसद है? गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अपने भाषण में अपनी सरकार के भयानक इरादों को स्पष्ट किया: “फिर वे लोग हैं जो आतंकवादी साहित्य रखते हैं और नौजवानों के दिमाग में आतंकवादी सिद्धांत भर देते हैं। आतंकवादी बंदूकों से नहीं बनता है। आतंकवाद की जड़ उसे फैलाने के लिये किया गया प्रचार और उन्माद है”। आगे उन्होंने यह भी कहा कि “व्यक्ति की मनोभावना आतंकवाद को जन्म देती है, न कि कोई संस्थान। अगर आप पहले ही व्यक्ति को दूसरे लोगों को विचारधारात्मक और वैत्तिक समर्थन देकर आतंकवाद की ओर आकर्षित करने से रोक सकते हैं, तो इस समस्या को ख़त्म किया जा सकता है”। अतः, व्यक्ति विशेष को आतंकवादी करार देना बेहद ज़रूरी है ताकि आतंकवाद की जड़ को ही काट दिया जाये, उन्होंने जोड़ा।

“आतंकवादी साहित्य” और “आतंकवादी प्रचार” की जानबूझकर कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। बीते दिनों में बहुत लोगों को कार्ल मार्क्स, वी.आई. लेनिन और शहीद भगत सिंह की किताबों को रखने के लिये, आतंकवाद-विरोधी कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया है। यू.ए.पी.ए. के तहत बहुत लोगों को मज़दूरों, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं, दलितों और अन्य उत्पीड़ित तबकों के अधिकारों के लिये संघर्ष करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है।

इस संशोधन के साथ, सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना कोई सबूत पेश किये या बिना कोई कानूनी कार्यवाही किये, आतंकवादी करार कर सकती है। जब किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है तो उसकी और उसके परिजनों की जींदगी नरक में जीने के समान हो जायेगी। राज्य के संस्थान बार-बार उन्हें उत्पीड़ित करेंगे, समाज में उनका बहिष्कार किया जायेगा, उनकी नौकरियां चली जायेंगी, मकान मालिक उन्हें घर से निकाल देंगे और मीडिया उन पर लगातार हमले करती रहेगी।

यू.ए.पी.ए. एक काला कानून है जिसे प्रतिरोध और संघर्ष की आवाज़ को कुचलने के लिये बार-बार इस्तेमाल किया गया है। हजारों-हजारों बेकसूर लोगों को निशाना बनाया गया है, आतंकवादी, उग्रवादी, अलगाववादी, राजद्रोही, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा, आदि करार दिया गया है, सिर्फ इस वजह से कि उनके विचार हुक्मरानों के ख़िलाफ़ हैं, कि उन्होंने मज़दूरों, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं, दलितों और अन्य उत्पीड़ित तबकों पर हो रहीं नाइंसाफी का विरोध किया है या सिर्फ अपने धार्मिक मतों की वजह से।

सरकार व्यक्ति विशेष को आतंकवादी करार कर देने की धमकी इसलिये दे रही है क्योंकि वह राजकीय आतंकवाद के विरोध में उठ रही आवाज़ को डरा-धमकाकर दबा देना चाहती है, शोषितों-पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करने वालों तथा समाज का वैकल्पिक नज़रिया पेश करने वालों को कुचल देना चाहती है। यू.ए.पी.ए. के इस प्रस्तावित संशोधन का डटकर विरोध करना होगा। 

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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