पुरानी पेंशन योजना बहाली के लिये आंदोलन

नेशनल मूवमेंट फोर ओल्ड पेंशन आंदोलन समिति के सदस्यों ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर, 8 अगस्त, 2019 को हनुमानगढ़ जिला कलेक्ट्रेट के कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। हनुमानगढ़ जंक्शन पर भी इस मांग को लेकर, समस्त कर्मचारी संगठन राजस्थान के तत्वावधान एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।

कलेक्ट्रेट के कार्यालय पर दोपहर एक से तीन बजे तक 18 संगठनों के प्रदर्शनकारियों ने जनसभा की। सभा में वक्ताओं ने आंदोलन की हुंकार भरते हुये कहा कि सरकार जब तक पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल नहीं करती, तब तक सरकारी कर्मचारी संगठन बार-बार अपना विरोध प्रकट करते रहंेगे। दोपहर तीन बजे कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री के नाम, जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा।

Pension Meeting

ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि 1 जनवरी, 2004 के बाद राजस्थान के 4 लाख सरकारी कर्मचारियों सहित देश के 65 लाख सरकारी कर्मचारियों के बुढ़ापे की पंेशन को केन्द्र और राज्य सरकारों ने बंद कर दिया है। नवीन पेंशन योजना में पेंशन की कोई गारंटी नहीं है और पेंशन संबंधित बहुत सी अनिश्चिततायें हैं। नई पेंशन योजना में निवेशित फंड पर बड़े-बड़े कार्पाेरेट घरानों की नज़र टिकी हुई है, और उनका मकसद है मज़दूरों को मिलने वाले वृद्धावस्था के सहारे के धन को लूटकर अपनी तिजौरियां भरना। इसमें सरकार नई पेंशन योजना को लाकर, कार्पाेरेट घरानों के हित में काम कर रही है। इसीलिये सरकारी कर्मचारी नई पेंशन योजना को ख़त्म करने और पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करवाने के लिये कानून पारित करवाने की मांग कर रहे हैं।

जनसभा को लोक राज संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुरु जी हनुमान प्रसाद शर्मा समेत, राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के जिला अध्यक्ष राम लुभाया तिन्ना, संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष, पटवार संघ जिला अध्यक्ष, राजस्थान भू अभिनिरिक्षक संघ, प्रबोधक संघ, राजस्थान राजस्व लेखा संघ, राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ, राजस्थान मंत्रालय कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।

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पुरानी पेंशन    Aug 16-31 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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