साम्राज्यवादी व्यवस्था से नाता तोड़ना होगा!

संपादक महोदय, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का 13 अगस्त, 2019 को जारी किया गया बयान मैंन पढ़ा। इसमें पार्टी ने पिछले 72 सालों का तर्कपूर्ण मूल्यांकन किया है। सरमायदारों के झूठों की एक-एक करके बखिया उधेड़ी है।

यह प्रचार किया जाता है कि अपने देश में विकास और लोक कल्याण के लिये लगातार बहुत काम किये जा रहे हैं। सच तो यह है कि 1947 में देश की सत्ता पूंजीपति वर्ग के हितों में काम करने वाले राजनेताओं को दी गयी थी। तब से अब तक, सभी सरकारों ने पूंजीपतियों के हितों को ही आगे बढ़ाया है। इसी कारण देश की अधिकांश जनता के विकास व कल्याण को इन अजगरों ने अपने शिकंजे में जकड़ रखा है और अमीरों व ग़रीबों के बीच की खाई लगातार गहरी और चैड़ी होती गयी है।

ग़रीबी मिटाने का जो भ्रम सरमायदारों ने फैला कर रखा था लोग उसका विरोध करने लगे। ऐसी स्थिति में पूंजीपति वर्ग की केन्द्र में बैठी सरकारों ने लोगों की एकता भंग करने और आंदोलन को गुमराह करके ख़त्म करने के लिये साम्प्रदायिकता का प्रयोग किया। पहले कांग्रेस पार्टी ने और फिर भाजपा ने अलग-अलग नाम से ऐसे कठोर व लोक-विरोधी कानून बनाये जिनके तहत किसी को भी बिना सबूत के गिरफ़्तार किया जा सकता है। संघर्ष करने वालों को आतंकवादी व अलगाववादी कहा जाता है।

“विकास” की इस दिशा के तहत देश के पूंजीपति बहुत अधिक शक्तिशाली हो गये और एक बड़ी साम्राज्यवादी ताक़त बनने की अपनी हवस को पूरा करने का सपना देख रहे हैं। इसके लिये पूंजीपति वर्ग दुनिया की साम्राज्यवादी ताक़तों के साथ गठबंधन बना रहा है। अमरीकी साम्राज्यवादी, दक्षिण एशिया में अपना दबदबा मजबूत करने के उद्देश्य से हिन्दोस्तान के साथ गठबंधन बना रहा है और साथ ही हिन्दोस्तान व पाकिस्तान के बीच कश्मीरी विवाद को हवा दे रहा है।

सरमायदार अपने दुष्ट इरादों को बढ़ाने के लिये लोगों को आतंकवादी और देशद्रोही कहलवाता है जबकि अर्थव्यवस्था की दिशा उसके हितों में बनी रहती है। वर्तमान अर्थव्यवस्था देश की जनता की खुशहाली व सुरक्षा के रास्ते में बहुत बड़ी रुकावट है। अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने के लिये, देश के लोकतांत्रिक नव-निर्माण आवश्यक है, जिसमें सभी लोगों के लोकतांत्रिक, राष्ट्रीय व मानव अधिकारों की रक्षा होगी तथा सभी के सुख व सुरक्षा की गारंटी होगी।

सुशील कौर, नई दिल्ली

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Sep 16-30 2019    Letters to Editor    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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