दिल्ली नगर निगम स्कूलों के शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द

14 अक्तूबर, 2019 को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सी.ए.टी.) के एक आदेश पर दिल्ली के तीनों नगर निगमों - उत्तर, दक्षिण और पूर्व के प्राथमिक स्कूलों के 3,778 शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। सी.ए.टी. का यह आदेश दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डी.एस.एस.एस.बी.) द्वारा सितंबर-अक्तूबर, 2018 में आयोजित की गई नगरपालिका शिक्षकों की भर्ती परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका के आधार पर एक साल पहले जारी किया गया था।

Teachers protest in New Delhi

इन शिक्षकों को शहर में फैले तीनों नगर निगमों के 1,600 से अधिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जाना था। उन्हें हाल ही में नियुक्ति पत्र दिए गए थे और 15 अक्तूबर से काम शुरू करना था।

दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एस.डी.एम.सी.), जो शिक्षकों की नियुक्ति के लिए तीनों नगर निगमों का केन्द्रीय निकाय है। जिसने 14 अक्तूबर की देर शाम एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा कि “भर्ती प्रक्रिया (सी.ए.टी.) का अगला आदेश आने तक रोक दी जाएगी। जारी किए गए सभी नियुक्ति पत्र रद्द किए जाते हैं।” इस बात पर ध्यान देना चाहिए की “पेपर लीक” होने के आरोपों के आधार पर इसी परीक्षा को पहले दो बार रद्द किया जा चुका है।

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डी.ओ.ई.) के अनुसार 7 अप्रैल, 2019 तक 10,591 शिक्षकों के पद खाली थे। लेकिन डी.एस.एस.एस.बी. ने आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों के इन रिक्त पदों के लिए विज्ञापन या आवेदन के लिये आमंत्रण भी जारी नहीं किए थे। अप्रैल 2019 में दिल्ली के चिंतित नागरिकों, वकीलों और दिल्ली के स्कूलों में जाने वाले छात्राओं और छात्रों के माता-पिता के समूह ने इस बात को लेकर एक याचिका दर्ज की थी। स्कूल के नये सत्र की अवधि प्रत्येक वर्ष अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू होती है।

7 अगस्त, 2019 को दिल्ली सरकार षिक्षा निदेषालय ने दिल्ली के उच्च न्यायालय से अतिथि अध्यापकों को दैनिक वेतन पर काम जारी रखने की अनुमति मांगी थी, जब तक कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10591 रिक्त पदों की नियुक्ति नहीं हो जाती। इन अध्यापकों का वेतन स्थायी अध्यापकों की तुलना में एक तिहाई से भी कम है। इस समय सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 17,000 अतिथि अध्यापक दिल्ली के अलग-अलग सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 760 स्कूलों के शिक्षकों ने 13 अक्तूबर को एक प्रेस नोट जारी किया। इसमें उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी क्योंकि उन्हें पिछले दो महीनों - अगस्त और सितंबर का वेतन नहीं मिला है। उन्होंने तुरंत अपना वेतन दिये जाने की मांग की है।

सरकारी स्कूल, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मेहनतकश लोगों के अधिकांश बच्चों के लिए शिक्षा का मुख्य स्रोत हैं। हिन्दोस्तानी राज्य ने स्कूली शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य द्वारा संचालित स्कूली शिक्षा प्रणाली की तरफ लापरवाही की है और उसे नष्ट करने के लिए हर संभव नीति का पालन किया है। स्कूली शिक्षा निजी पूंजीवादी समूहों के लिए एक विशाल और अत्यधिक लाभदायक बाज़ार है, जो आज इस क्षेत्र में व्यापक रूप से फैला हुआ है। जहां सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों की भारी कमी है, वहीं निजी स्कूल बच्चों को “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने“ के नाम पर मोटी फीस वसूल कर मज़दूरों को लूटते हैं। कांग्रेस और भाजपा जैसी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेता इनमें से कई निजी संस्थानों के मालिक हैं।

राज्य द्वारा संचालित स्कूली शिक्षा प्रणाली के आपराधिक विनाश और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण के चलते लाखों मज़दूरों के बच्चों के लिए शिक्षा और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने के सपनों का बेरहमी से क़त्ल हो रहा है। यह हमारे देश में मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर शर्मनाक कलंक है।

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Nov 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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