मदरसन के मज़दूरों का यूनियन बनाने के अधिकार के लिए संघर्ष

23 अगस्त, 2019 को तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के पोंदुर गांव में स्थित मदरसन के स्थायी मज़दूरों ने अपने यूनियन को मान्यता देने, काम के बेहतर हालात और बेहतर वेतन की मांग को लेकर हड़ताल की।

Motherson workers on strike

इसके बाद मज़दूरों को प्रबंधन द्वारा बदले की कार्यवाही का सामना करना पड़ा। मज़दूरों द्वारा हड़ताल घोषित किये जाने के तुरंत बाद मैनेजमेंट ने कॉन्ट्रैक्ट मज़दूरों को काम पर लगाने में थोड़ी भी देरी नहीं की। इसके साथ ही मैनेजमेंट ने हड़ताली मज़दूरों के खि़लाफ़ “कारण बताओ” नोटिस जारी किये, हालांकि मज़दूरों ने कानून के अनुसार हड़ताल की जानकारी प्रबंधन को पहले से दे रखी थी। प्रबंधन की यह कार्यवाही औद्योगिक विवाद अधिनियम के उल्लंघन में की गयी है।

पोंदुर के मेट-3 यूनिट में 568 स्थायी मज़दूर काम करते हैं। इसके अलावा इस यूनिट में कुछ सौ कॉन्ट्रैक्ट मज़दूर और एन...एम. (नीम) प्रशिक्षु मज़दूर भी हैं। मदरसन देश का सबसे बड़ा ऑटो कलपुर्जों का उत्पादक है। यह कंपनी की ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए मोल्डेड कलपुर्जे बनाने में महारत है। मदरसन के कारखाने तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में हैं। हड़ताल पर बैठे मज़दूरों का समर्थन कर्नाटक के बिदादी में मदरसन वर्कर्स यूनियन ने भी किया है।

ख़बरों के अनुसार मज़दूरों को 8 वर्ष के अनुभव के बावजूद केवल 9,000-10,000 रुपये ही वेतन के रूप में मिलते हैं और इसके अलावा उन्हें कोई और सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। कारखाने तक जाने के लिए न तो पर्याप्त यातायात के साधन हैं और न ही कैंटीन की सुविधा है। उदाहरण के लिए रात की शिफ्ट में काम करने वाले मज़दूरों को खाना नहीं, केवल नाश्ता दिया जाता है। इसके अलावा मज़दूरों ने बताया है कि प्रबंधन और बाहर से लाये गए कैंटीन व अन्य सेवाओं के कर्मचारी उनके साथ दुव्र्यवहार करते हैं।

अपनी समस्याओं पर प्रबंधन के साथ बातचीत करने के लिए स्थायी मज़दूरों ने अपनी युनियन गठित की। मज़दूरों के इस क़दम के जवाब में मैनेजमेंट ने 30 जुलाई को शिफ्ट-2 और शिफ्ट-3 में काम करने वाले मज़दूरों से काम पर जाने से पहले लिखित घोषणा पत्र लिया कि वे इस यूनियन के सदस्य नहीं बनेंगे। मज़दूरों को इस घोषणा पत्र की प्रति नहीं दी गयी। कई मज़दूरों ने इस घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया।

इसे 31 जुलाई को दोहराया गया जब, शिफ्ट-1 के मज़दूर काम पर आये। प्रबंधन के इस रवैये के चलते मज़दूरों ने कारखाने में प्रदर्शन शुरू कर दिया और मांग की कि उनको काम करने दिया जाये और उनकी लंबित शिकायतों पर बातचीत शुरू की जाये।

जब प्रबंधन ने उन्हें काम पर जाने से रोका तब स्थायी मज़दूरों ने कारखाने में ही 2-दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। 2 अगस्त को मैनेजमेंट ने नरमी दिखाते हुए मज़दूरों से घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने की शर्त को वापस ले लिया और मज़दूर वापस काम पर आ गए।

13 सितम्बर को मज़दूरों और उनके परिजनों ने श्रीपेरंबुदूर में एक धरना आयोजित किया और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन देते हुये मज़दूरों और प्रबंधन के बीच विवाद को ख़त्म करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की।

प्रबंधन के साथ बातचीत के कई सत्रों के बाद भी मज़दूरों को कोई संतोषजनक नतीजा नहीं मिला है और मज़दूरों की हड़ताल अभी जारी है।

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Nov 16-30 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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