दिल्ली की फैक्ट्री में भयानक अग्निकांड : दिल्ली की ट्रेड यूनियनों ने श्रद्धांजली सभा की

8 दिसम्बर की भोर में, रानी झांसी रोड पर स्थित अनाज मंडी में 4 मंजिला फैक्ट्री में हुए अग्निकांड में 43 श्रमिकों की जलकर मौत हो गयी। बड़ी संख्या में श्रमिक इस अग्निकांड से पीड़ित हुये हैं।

रानी झांसी रोड पर फिल्मीस्तान सिनेमा के सामने 11 दिसम्बर, 2019 को फैक्ट्री में हुए अग्निकांड के मृतकों के लिए एक श्रद्धांजलि सभा हुई।

Memorial meeting

यह श्रद्धांजलि सभा दिल्ली की संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा आयोजित की गई थी। इसके आयोजक थे - एटक, सीटू, एच.एम.एस., ए.आई.सी.सी.टी.यू., यू.टी.यू.सी., इंटक, सेवा, ए.आई.यू.टी.यू.सी., एल.पी.एफ. और मज़दूर एकता कमेटी। सभा में ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेता नत्थुराम भी उपस्थित थे। इसके अलावा, सैकड़ों की संख्या में स्थानीय श्रमिक और नागरिक भी उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की। इस घटना से संबंधित, फैक्ट्री मालिक और सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों को तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिए जाने की मांग की गई। यह भी मांग की गई कि घटना की न्यायिक जांच समयबद्ध की जाए। मृतक परिवार के एक सदस्य के लिए नौकरी और 50 लाख मुआवज़ा दिए जाने की मांग की गई।

वक्ताओं ने बताया कि मृतकों में नाबालिगों के होने की भी जानकारी मिली है। यह जांच का विषय है। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि वे रात में काम करने के बाद थककर फैक्ट्री में सो रहे थे। बाहर से शटर लगा हुआ था। 600 गज में बनी इस चार मंजिली फैक्ट्री से निकलने का शटर के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इस फैक्ट्री में प्लास्टिक के खिलौने और बैग बनाने का काम होता था। यह बिल्डिंग और उसमें चल रहा काम पूरी तरह से अवैध था। न तो किसी तरह का कोई लाइसेंस लिया गया था न ही इसका कोई रजिस्ट्रेशन कराया गया था। फैक्ट्री को चलाने के लिए न तो कोई सर्टिफिकेट लिया गया था और न ही यहां पर फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम थे। यह फैक्ट्री एक संकरी गली में थी, जहां बचाव कार्य भी मुश्किल से हो सकता था।

वक्ताओं ने समझाया कि आज लाखों की संख्या में कंपनियां अनिवार्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करके चलाई जा रही हैं। ये कंपनियां आपदा के समय हजारों श्रमिकों की ज़िंदगी को लील लेंगी। इन कंपनियों को कानूनी स्वीकृति नहीं है परन्तु केन्द्र और राज्य सरकार तथा उनकी सभी सरकारी एजेंसियों की इन्हें मूक स्वीकृति होती है। ये कंपनियां, तमाम सरकारी एजेंसियों सहित राजनीतिक पार्टियों के लिए अवैध कमाई का साधन हैं। साथ ही, सरकार की तिजौरी में कानूनी रूप से यहां से टैक्स आता है।

यह अमानवीय पूंजीवादी व्यवस्था का एक बदसूरत चेहरा है। हर ऐसे हादसे के बाद मुआवज़ा देकर मजदूरों को शांत कर दिया जाता है परन्तु यह समस्या का कोई समाधान नहीं है। न ही यह भविष्य में इस प्रकार के घातक कांडों के फिर न होने की कोई गारंटी है। हम मज़दूरों को एकजुट होकर इसके खि़लाफ़ आवाज़ उठानी होगी।

हमारे देश के श्रमिकों का जीवन बहुमूल्य है। हमें मांग करनी चाहिए कि इस प्रकार के हादसों में होने वाली मौत पर सरकार और उसकी एजेंसियों तथा राज्य के सारे संस्थानों, जिनकी ज़िम्मेंदारी है हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करना, उन सबको कठघरे में खड़ा होना चाहिए।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करने वालों में थे - एटक से मुकेश कश्यप, सीटू से अनुराग, एच.एम.एस. से राजेन्द्र, ए.आई.सी.सी.टी.यू. से संतोष राय, ए.आई.यू.टी.यू.सी. से मैनेजर चैरसिया, यू.टी.यू.सी. से शत्रुजीत सिंह, मज़दूर एकता कमेटी से बिरजू नायक, इंटक से अमजद हसन, सेवा से लता, एल.पी.एफ. से मोहन कुमार और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से का. नत्थुराम।

सभा के अंत में मृतकों के लिए मौन रखा गया।

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Dec 16-31 2019    Voice of Toilers and Tillers    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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