भारतीय रेल के ट्रेक-मेन्टेनरों का निजीकरण के खि़लाफ़ प्रदर्शन

ऑल इंडिया ट्रेक-मेन्टेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू.) ने 2 दिसम्बर, 2019 को जूनागढ़, गुजरात में अपनी डिविजनल मीटिंग आयोजित की। मीटिंग को ए.आई.आर.टी.यू. के नेताओं और कामगार एकता कमेटी के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। मज़दूर एकता ज़िंदाबाद और महिला शक्ति ज़िंदाबाद के लड़ाकू नारों से स्टेशन गूंज रहा था।

Trackmen's meeting in Junagarh
Junagarh

ए.आई.आर.टी.यू. के डिविजनल सचिव, विनोद मीना और ए.आई.आर.टी.यू. के राष्ट्रीय अध्यक्ष, नरेन्द्र पंचाल ने मीटिंग को संबोधित किया। उन्होंने ट्रेक-मेन्टेनरों की बहुत कठिन और खराब कार्य परिस्थितियों की तरफ ध्यान दिलाया और बताया की उनकी यूनियन के कारण ही वे अत्याधिक शोषण और दमन को कम कर पायें हैं; यूनियन के  सफलतापूर्वक संघर्ष के कारण वे रेलवे से कुछ सुरक्षा सामान जैसे कि जूते और आने वाली रेलगाड़ी की ट्रेक-मेन्टेनरों को चेतावनी देने के लिए हूटर प्रदान करा पाए हैं। उसके संघर्ष के कारण ही मज़दूरों को बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश जैसे अधिकार मिल पाए हैं।

दोनों वक्ताओं ने सरकार के निजीकरण अभियान की निंदा की और कहा कि यूनियन  8 जनवरी, 2020 को होने वाली अखिल भारतीय आम हड़ताल में लड़ाकू रूप से सहभाग के लिए प्रतिबद्ध है।

कामगार एकता कमेटी के प्रतिनिधियों ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने सरकार के निजीकरण की ख़तरनाक योजना का पर्दाफाश किया और उसकी निंदा की। उन्होंने समझाया कि कैसे सरकार एक के बाद एक बी.एस.एन.एल., बी.पी.सी.एल. और एयर इंडिया जैसी सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण के दिशा में आगे बढ़ रही है। बी.पी.सी.एल. एक बहुत लाभदायक सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनी है फिर भी उसका निजीकरण कर रही है और बी.एस.एन.एल. तथा एयर इंडिया के विषय में उसने पहले उन्हें बहुत नुकसानदायक बना दिया और अब वह उन्हें पूंजीपतियों को कौड़ियों के दाम बेचना चाहती है।

मजदूर एकता लहर भारतीय रेल के ट्रेक-मेन्टेनरों का अपनी बिगड़ती कार्य परिस्थिति और रेलवे के निजीकरण के खि़लाफ़ संघर्ष का समर्थन करती है।

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Jan 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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