हमारी पार्टी की स्थापना के 40वें वर्ष के आरम्भ पर जोशपूर्ण समारोह

हमारी पार्टी की स्थापना के 40वें वर्ष के आरम्भ के अवसर पर, देश की कई जगहों पर तथा विदेशों में पार्टी के कामरेड जोशपूर्ण समारोह मना रहे हैं। हर जगह पर, इन समारोहों में आशावाद की भावना भरपूर है।

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29 दिसंबर को इस अवसर पर नयी दिल्ली में एक सभा आयोजित की गयी थी। “हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के 40वें वर्ष के आरम्भ पर लाल सलाम!” - लाल बैनर पर लिखे हुए इस सन्देश के साथ, सभागृह में प्रवेश करने वाले कामरेडों का स्वागत किया गया।

लाल झंडे फहराती हुयी युवतियों ने ‘ग़दर पार्टी लाल सलाम’ गीत के साथ, मंच पर प्रस्थान करके, सभा की शुरुआत की। पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह ने मंच पर अपना स्थान ग्रहण किया और सभी उपस्थित लोगों ने खड़े होकर, ज़ोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया। पार्टी की स्थापना के बाद के बीते 39 वर्षों के प्रतीक बतौर, एक नौजवान कामरेड ने 39 लाल गुलाब के फूलों के गुलदस्ते के साथ उनका स्वागत किया।

मंच से कामरेड लाल सिंह ने पार्टी के सभी कामरेडों को सलाम किया, उन सबको जो सभा में मौजूद थे तथा उन सबको भी, जो देश की अन्य जगहों पर व विदेशों में पार्टी की सालगिरह मना रहे हैं।

हमारे देश के लोगों के लिए यह बहुत ही ख़तरनाक घड़ी है। वर्तमान सरकार सबसे दमनकारी और जन-विरोधी सरकारों में से एक है। उसने हमारे लोगों पर वहशी आतंक की मुहिम छेड़ रखी है।

इस बेहद जन-विरोधी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को पास किया है। वह बड़ी क्रूरता के साथ नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी को लागू कर रही है, जिसकी वजह से दसों-लाखों लोगों पर अपनी नागरिकता के अधिकार खोने और बंदीघरों में भेजे जाने का ख़तरा मंडरा रहा है। इन क़दमों के विरोध में, करोड़ों-करोड़ों लोग प्रतिदिन सड़कों पर उतर रहे हैं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले नौजवानों को राज्य निशाना बना रहा है। प्रदर्शनकारी नौजवानों को ‘अपराधी’ और ‘आतंकवादी’ बताया जा रहा है, दरवाज़ों पर उनकी तस्वीरें चिपकाई जा रही हैं और उनकी गिरफ़्तारी के वारंट जारी किये जा रहे हैं। मां-बाप को यह नहीं मालूम होता है कि उनके बेटे-बेटियां रात को घर वापस लौटेंगे या नहीं। कई बार उन्हें अपने बच्चों की तलाश में, एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन तक भटकना पड़ता है। कई लोग मारे गये हैं, तो कई और घायल हुए हैं।

कामरेड लाल सिंह ने वर्तमान स्थिति की तुलना 1980 के दशक में पंजाब की स्थिति के साथ की। उस समय भी मां-बाप अपने बच्चों का इंतजार करते रहते थे पर बच्चे वापस नहीं आते थे, क्योंकि राज्य के बर्बर सुरक्षा बल या तो उन्हें जेल में बंद कर देते थे, या उन्हें तड़पा-तड़पा कर मार डालते थे और उनकी लाशों को नहरों में फेंक देते थे। कामरेड लाल सिंह ने जन-विरोध को बदनाम करने के लिए हुक्मरान वर्ग द्वारा फैलाये गए झूठे प्रचार की कड़ी निंदा की। जबकि लोग शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं, तो उन पर पथराव करने और बसें जलाने के झूठे इल्जाम लगाये जा रहे हैं। वस्तव में, राज्य ही इस हिंसा को आयोजित कर रहा है। यह हुक्मरान वर्ग की परखी हुयी रणनीति है जो दशकों से चल रही है। सरमायदार इस प्रकार की हिंसा आयोजित करते हैं ताकि प्रदर्शनकारियों पर ‘अराजकता फैलाने’ का इल्जाम लगाया जा सके और लोगों को ‘आतकंवादी’ करार दिया जा सके।

आज चारों तरफ अंधेरा है परन्तु यह अंधेरा ख़त्म होगा और एक नयी सुबह अवश्य आयेगी। हमारी पार्टी ने लोगों को इस अंधेरे से बाहर निकाल कर रोशनी की ओर ले जाने का बीड़ा उठाया है। देश के लोग अवश्य ही एक झंडे तले इकट्ठे होकर, इस बेहद दमनकारी और शोषक हुकूमत को ख़त्म कर डालेंगे। लोग हिन्दोस्तान के मालिक होंगे और सभी की सुख-सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। यह ग़दरियों की पुकार थी और यही हमारी पार्टी की गंभीर वचनबद्धता है। हम ग़दरी हैं, हम अपनी कथनी को करनी में बदल देंगे।

हमारे हुक्मरानों की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। हमारे देश के संविधान में, एक अनुच्छेद में ढेर सारे वादे किये जाते हैं पर अगले अनुच्छेद में उन्हें नकारा जाता है। हुक्मरान वर्ग यह झूठ दोहराता रहता है कि हिन्दोस्तान में सबके लिए लोकतंत्र है, पर हक़ीक़त इसका ठीक उल्टा है। फैसले लेने का अधिकार कार्यकारिणी के हाथों में संकेंद्रित है। जो भी सरकार सत्ता में आती है, वह सबसे बड़े इजारेदार पूंजीपतियों की अगुवाई में पूंजीपति वर्ग के कार्यक्रम को ही लागू करती है। सरकार का हर क़दम पूंजीपति वर्ग के हितों की सेवा में और जनसमुदाय के हितों के ख़िलाफ़ होता है। सभी सरकारें मुट्ठीभर शोषकों के हित में ही काम करती हैं।

कामरेड लाल सिंह ने 2014 में इस सरकार के सत्ता में आने के बाद, उसके द्वारा लिए गए कुछ मुख्य जन-विरोधी क़दमों का विवरण दिया। हर ऐसे क़दम के असली मक़सद को छुपाने के लिए, ढेर सारे झूठ बोले गए हैं।

11 मार्च, 2016 को सरकार ने आधार कार्ड को बाध्यकारी बना दिया। बैंक खाता खोलने से लेकर राशन या पेंशन पाने तक के लिए आधार कार्ड को ज़रूरी बनाकर, सरकार ने लोगों के जीवन में बड़ी अस्त-व्यस्तता पैदा कर दी।

8 नवम्बर, 2016 को सरकार ने लोगों को कोई चेतावनी दिए बिना, अपनी ही पार्टी के सदस्यों या सरकार के दूसरे सदस्यों या विपक्ष की पार्टियों से सलाह किये बिना, रातों-रात नोटबंदी की घोषणा कर दी। लोगों को बड़ी कठिनाइयां झेलनी पड़ीं, अनेक छोटे कारोबार तबाह हो गए, किसानों के पास बीज आदि खरीदने के पैसे नहीं थे। लोगों को रोज़मर्रे के खर्चे के पैसों के लिए प्रतिदिन, कई घंटों तक, बैंकों के सामने लाइन लगानी पड़ी।

5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को, संसद में कोई चर्चा किये बिना या कश्मीर के लोगों के साथ कोई सलाह किये बिना ही, रद्द कर दिया गया। यह कश्मीर के लोगों और उनके अधिकारों के संघर्ष पर अभूतपूर्व हमला था। कश्मीर के हर शहर और गांव में हजारों की संख्या में सैनिक तैनात किये गए। टेलिफोन और इन्टरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया, मीडिया का ब्लैक आउट किया गया और कर्फ्यू लगा दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार का जन-विरोध न हो सके। विपक्षी पार्टियों के नेताओं और हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया। सरकार ने घोषित कर दिया कि भूतपूर्व कश्मीर राज्य को दो टुकड़ों में बांटकर, दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बदल दिया जायेगा। इसका मक़सद था लोगों की एकता को तोड़ना।

9 नवम्बर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया कि अयोध्या में ठीक उसी स्थान पर राम मंदिर बनाया जायेगा, जहां बाबरी मस्जिद हुआ करती थी, जिसे भाजपा और कांग्रेस पार्टी की सांठ-गांठ में, दिसंबर 1992 में तोड़ा गया था। यह फैसला बरतानवी उपनिवेशवादियों और वर्तमान हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा फैलाये गए ढेर सारे झूठों के आधार पर दिया गया, जिनमें पहला झूठ था मस्जिद के अन्दर राम लल्ला की मूर्ती के ‘किसी चमत्कार से आ पहुंचने’ के बारे में प्रचार।

कामरेड लाल सिंह ने सरमायदारों और उनकी सफाई देने वालों के उस झूठे प्रचार का पर्दाफाश किया कि सुप्रीम कोर्ट एक “स्वतंत्र निकाय” है और जब-जब सरकार लोगों पर हमला करती है तो लोग सुप्रीम कोर्ट से इन्साफ की उम्मीद कर सकते हैं। न्यायपालिका हिन्दोस्तानी राज्य का उतना ही अटूट हिस्सा है जितना कि कार्यकारिणी और संसद। न्यायपालिका सरकार के सरासर जन-विरोधी फैसलों को वैधता का जामा पहनाने का काम करता है।

इजारेदार पूंजीपतियों की अगुवाई में पूंजीपति वर्ग राज्य के सभी अंगों पर नियंत्रण करता है। इसीलिये सरकारें बदलती हैं परन्तु लोगों की हालतों में कोई तबदीली नहीं होती क्योंकि हुक्मरान वर्ग नहीं बदलता है। हुक्मरान वर्ग और उसकी पार्टियां बार-बार इस झूठ को दोहराती रहती हैं कि अगर इस या उस पार्टी की सरकार बन जाती है तो लोगों की हालतें बदल जायेंगी। हम हुक्मरान वर्ग की पार्टियों से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे लोगों को सच बताएंगी।

दुःख की बात तो यह है कि कम्युनिस्ट आन्दोलन के अंदर कई पार्टियां हैं जो इस व्यवस्था के बारे में सच्चाई को लोगों से छुपाती हैं। ये पार्टियां हिन्दोस्तानी राज्य, उसके संविधान और मज़दूरों व किसानों पर हुक्मरान वर्ग के अधिनायकत्व, जिसे लोकतंत्र कहा जाता है, उसके बारे में भ्रम फैलाती हैं। ये पार्टियां मौजूदा संविधान और मौजूदा लोकतंत्र को बचाने की मांग कर रही हैं। मज़दूरों और किसानों को उनसे यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या यह संविधान और लोकतंत्र वास्तव में लोगों की सेवा करते हैं? इसका जवाब हमारे लिए बहुत स्पष्ट है। वे लोगों की सेवा नहीं करते। बल्कि, वे लोगों पर हुक्मरान वर्ग के शोषक और दमनकारी शासन को वैधता दिलाने का काम करते हैं।

हमारी पार्टी को इस व्यवस्था के असली चरित्र और संविधान के बारे में फैलाये गए झूठों का पर्दाफाश करने का काम और तेज़ करना होगा। हम इस व्यवस्था के बारे में कोई भ्रम नहीं पैदा कर सकते हैं। हम एक नए राज्य की स्थापना करने के उद्देश्य के साथ काम कर रहे हैं, जिसमें मज़दूर और किसान हुक्मरान होंगे और जिसका नया संविधान होगा। हमें इस उद्देश्य के इर्द-गिर्द सभी कम्युनिस्टों की एकता बनाने के लिए काम करना होगा।

आज लोग नागरिकता संशोधन कानून और नागरिकता की राष्ट्रीय पंजी के बारे में बहुत खफा हैं और मांग कर रहे हैं कि इन्हें वापस लिया जाये। लोग राज्य के भारी दमन को चुनौती देते हुए, सड़क पर उतर कर विरोध कर रहे हैं। यह सरकार के झूठे प्रचारों का मुंहतोड़ जवाब है। कामरेड लाल सिंह ने जामिया मिलिया विश्वविद्यालय की छात्राओं की सराहना की, जिन्होंने वह चिंगारी जलाई जिससे पूरे देश में सरकार की जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ आग धधक उठी। अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ लोगों का संघर्ष जैसे-जैसे और तेज़ होता जायेगा, वैसे-वैसे लोग इस “लोकतंत्र” और संविधान के बारे में सच्चाई को समझने लगेंगे। लोग एक ऐसी नयी व्यवस्था के लिए संघर्ष करेंगे जिसमें फैसले लेने की ताक़त लोगों के हाथ में होगी। लोग मौजूदा राज्य और उसके संविधान को ठुकरा देंगे और एक नए राज्य के लिए संघर्ष करेंगे, जिसका संविधान वास्तव में सबके लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

कामरेड लाल सिंह ने समझाया कि मुसलमानों पर हिन्दोस्तानी राज्य का हमला बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों की रणनीति के समान है, जिसके अनुसार दुनियाभर में मुसलमानों को “आतंकवादी” और “रूढ़िवादी” बताकर, उन पर हमला किया जाता है। बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी “सभ्यताओं के टकराव” के सिद्धांत को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसके अनुसार दुनिया में मुख्य संघर्ष ईसाई और मुसलमान धर्मों के लोगों के बीच में है। वे जानबूझकर मुसलमान लोगों को आतंकवादी, हैवान, आदि जैसे पेश करते हैं। उनका इरादा है लोगों की एकता को तोड़ना। साम्राज्यवादी और हमारे देश के हुक्मरान इस सच्चाई को छुपाना चाहते हैं कि समाज में चल रहे असली संघर्ष में एक तरफ सरमायदारों की अगुवाई में सभी शोषक हैं और दूसरी तरफ मज़दूर वर्ग की अगुवाई में सभी शोषित और उत्पीड़ित लोग हैं। वे क्रांति और कम्युनिज्म से डरे हुए हैं। 

39 साल पहले हमने अपनी पार्टी का निर्माण किया था, इस जन-विरोधी, शोषक और दमनकारी पूंजीवादी व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए। हमारी पार्टी सरमायदारों की हुकूमत को ख़त्म करने के लिए मज़दूर वर्ग और सभी शोषितों को संगठित कर रही है। कुछ दशक पहले, ‘लाल किले पर लाल निशान मांग रहा है हिन्दोस्तान!’ का नारा देशभर के शहर और गांव में गूंजता था। कामरेड लाल सिंह ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वह दिन दूर नहीं है जब यह नारा फिर से हर शहरों और गांवों में गूंजेगा, अगर हम लोगों को अपनी मुक्ति का रास्ता, सच्चे लोकतंत्र और समाजवाद हासिल करने का रास्ता बताने का अपना काम और बढ़ा देंगे।

कामरेड लाल सिंह के प्रेरणाजनक भाषण को सभी उपस्थित लोगों ने लम्बे समय तक तालियां बजाकर स्वीकार किया। उसके बाद, कई कामरेडों ने पार्टी के साथ सालों-सालों तक काम करने के अपने अनुभवों के बारे में अपनी बातें रखीं। कामरेडों ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि पार्टी मज़दूर वर्ग के प्रति और क्रांति के ज़रिये शोषकों के राज को ख़त्म करने के लक्ष्य के प्रति वफादारी के साथ काम करती रही है। उन्होंने माक्र्सवाद-लेनिनवाद के आधार पर पार्टी के विचारों और कार्यों की सराहना की। कई नौजवान कामरेडों ने कहा कि पार्टी के साथ काम करते हुए उन्होंने यह सीखा है कि कम्युनिस्ट और इंसान बनना क्या होता है। कामरेडों ने पार्टी के प्रति आभार प्रकट किया और बीते 39 सालों से क्रांति की फतह पर दृढ़ विश्वास रखते हुए पार्टी के काम को सलाम किया।

उसके बाद, पार्टी के बच्चों और नौजवानों ने एक जोश-भरा सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। हमारे लोगों की विविध संस्कृति को दर्शाते हुए, बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ लोक नृत्य पेश किये। नौजवानों ने गीत, नृत्य और कवितायें पेश कीं, जिनमें उन्होंने हमारे लोगों की गहरी क्रांतिकारी परम्पराओं, हमारी जुझारू भावनाओं और हर प्रकार की गुलामी व शोषण से मुक्ति के लिए लड़ने की इच्छा प्रकट की।

पार्टी के 40वें साल में प्रवेश के इस समारोह के अंत में इंटरनेशनल गीत गाया गया। “हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ज़िंदाबाद!”, “लाल किले पर लाल निशान मांग रहा है हिन्दोस्तान!”, “मार्क्सवाद-लेनिनवाद ज़िंदाबाद!”, “इन्क़लाब ज़िंदाबाद!”, के नारे चारों ओर गूंज उठे। आशावाद, पार्टी की लाइन पर भरोसा और आने वाले दिनों में अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए उत्साह से काम करने की दृढ़ता सभी कामरेडों के चहरों पर दिख रहे थे।  

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Jan 1-15 2020    Voice of the Party    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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निजीकरण और उदारीकरण के कार्यक्रम की हरायें!

मजदूरों और किसानों की सत्ता स्थापित करने के उद्देश्य से संघर्ष करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का आवाहन, २३ फरवरी २०१२

अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों - बैंकिंग और बीमा, मशीनरी और यंत्रों का विनिर्माण, रेलवे, बंदरगाह, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आदि - के मजदूर यूनियनों के बहुत से संघों ने 28 फरवरी २०१२ को सर्व हिंद आम हड़ताल आयोजित करने का फैसला घोषित किया है। यह हड़ताल मजदूर वर्ग की सांझी तत्कालीन मांगों को आगे रखने के लिये की जा रही है।

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मजदूर वर्ग के लिये राज्य सत्ता को अपने हाथ में लेने की जरूरत23-24 दिसम्बर, 2011 को मजदूर वर्ग गोष्ठी में प्रारंभिक दस्तावेज कामरेड लाल सिंह ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से पेश किया। मजदूर वर्ग के लिये राज्य सत्ता को अपने हाथ में लेने की जरूरत शीर्षक के इस दस्तावेज को, गोष्ठी में हुई चर्चा के आधार पर, संपादित किया गया है और केन्द्रीय समिति के फैसले के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

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