सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ देशभर में विरोध जारी

12 दिसंबर को नागरिकता संशोधन अधिनियम पर राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद से और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों पर हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुआ। यह विरोध प्रदर्शन नए साल में पूरे जोश के साथ जारी है। दिल्ली, बेंगलूरू और देश के कई अन्य शहरों में नए साल का आगमन इन नारों के साथ हुआ - “सी.ए.ए.-एन.आर.सी. नहीं चलेगा!”, “छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है!”, ”धर्म को नागरिकता का आधार बनाना हमें मंजूर नहीं!”

Country-wide protests against CAA
Shaheen Bagh protest
Protest in Pune against CAA

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में स्थित शाहीन बाग में सी.ए.ए.-एन.आर.सी. के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन 16 दिसम्बर से जारी है। लगातार एक महीने से प्रतिदिन महिलाओं की अगुवाई में कड़ाके की ठंड में हजारों लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। शाम 5 बजे से रात्रि 2 बजे तक इस प्रदर्शन में महिलायें, बच्चे, लड़कियां, छात्र-छात्रायें बड़ी संख्या शामिल होती हैं। 12 जनवरी की रात को यह संख्या 1 लाख से ऊपर पहुंच गयी। आसपास की महिलाएं अपने रोज़मर्रा के कामों को निपटाकर विरोध प्रदर्शन में आ जुटती हैं। कामकाजी पुरुष और महिलाएं शाम को प्रदर्शन में शामिल हो जाते हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन जारी है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। वहां हर रोज़ हजारों छात्र व नागरिक, सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ तरह-तरह के प्लेकार्ड लिए विश्वविद्यालय के बाहर सड़क की एक ओर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी के साथ, नववर्ष के आगमन पर इंडिया गेट पर प्रदर्शन से हुआ। यहां फैज़ अहमद फैज़ की ग़जल “हम देखेंगे” प्रदर्शनकारियों के होठों पर गूंजती रही। उन्होंने इस काले कानून के खि़लाफ़ लड़ाई को उसकी अंतिम मंजिल तक ले जाने की कसम खायी।

1 जनवरी को जामिया नगर में सी.ए.ए.-एन.आर.सी. के ख़िलाफ़ एक विशाल जुलूस निकाला गया जो कि ओखला विहार मेट्रो स्टेशन तक फैल गया।

देश के कई शहरों में लोग सी.ए.ए. और एन.आर.सी. विरोधी नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आये और साथ ही उन्होंने देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्रों पर किये जा रहे हमलों का भी एकमत से विरोध किया। 15 दिसम्बर को जामिया मिलिया के छात्रों पर राज्य के बेरहम हमलों और 5 जनवरी को जे.एन.यू. के छात्रों पर किये गये जानलेवा हमलों के खि़लाफ़ हजारों-हजारों छात्रों और नागरिकों ने रात भर पुलिस मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किये और बर्बर राजकीय आतंक के ज़रिये जनता के विरोध की आवाज़ को कुचलने की कोशिशों की कड़ी निंदा की।

11 जनवरी को अलायन्स अगेंस्ट सी.ए.ए एण्ड एन.आर.सी. के बैनर तले सैंकड़ों महिलाओं ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। 6 जनवरी को महाराष्ट्र के मालेगांव में सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ दूसरा सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन केवल महिलाओं द्वारा आयोजित किया गया। इसमें 50,000 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ, मालेगांव की महिलाओं के सबसे पुराने मदरसे जामिया-तुस-सवालेहत के सामने दोपहर 2 बजे जमा हो गयीं। इससे पहले 19 दिसंबर को कई हजार लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।

8 जनवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में 10,000 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने सी.ए.ए.-एन.आर.सी. के खि़लाफ़ और अपनी दूसरी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। उन्होंने अपने विश्वविद्यालय में छात्रों पर किये जा रहे हमलों के खि़लाफ़ कक्षा का बहिष्कार करते हुए प्रदर्शन किया। दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स, सैंट स्टीफेंस कॉलेज, मिरांडा हाउस, किरोड़ीमल कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय के कई और कॉलेजों के छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया। जे.एन.यू. के छात्रों पर किये गए कातिलाना हमले पर सभी छात्रों की भावनाओं को व्यक्त करते हुए एक छात्र ने कहा - “पहले तो सरकार फीस बढ़ाती है। जब छात्र उसका विरोध करते हैं तो उनको पीटने के लिए पुलिस भेजती है और अंत में छात्रों में आतंक और अफरातफरी का माहौल पैदा करने के लिए गुंडों का इस्तेमाल करती है।”

उसी दिन ट्रेड यूनियनों की सर्व हिन्द हड़ताल के दौरान, देशभर में हुए प्रदर्शनों, रैलियों और जुलूसों में मज़दूरों-किसानों की लंबित मांगों के साथ-साथ, सी.ए.ए. और एन.आर.सी. की निंदा की गयी और सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की गयी।

उसी दिन लाल कुआं में हमदर्द दवाखाना से जामा मस्जिद गेट नंबर 1 तक सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ एक जुलूस निकाला गया, जिसमें हजारों ने हाथों में मोमबत्ती लिए हिस्सा लिया।

4 जनवरी को सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. के खि़लाफ़ “मिलियन मार्च” आयोजित किया गया। इसमें हैदराबाद और सिकंदराबाद और आस-पास के जिलों के लोगों ने बड़ी तादाद में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन तेलंगाना और आंध्रप्रदेश जॉइंट एक्शन कमेटी (जे.ए.सी.) ने आयोजित किया जिसमें मुस्लिमों और दलितों के 40 संगठन शामिल थे। यह विरोध प्रदर्शन 3 घंटों तक चला और हैदराबाद-सिकंदराबाद को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह से जाम हो गयी। शहर की सड़कों पर महिलाओं, पुरुषों, नौजवानों और बच्चों ने प्लाकार्ड व बैनर लेकर मार्च किया और सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाये। समाज के सभी तबकों के लोग - व्यापारी, वकील, लेखक, पत्रकार, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अन्य प्रोफेशनल, छात्र, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, धार्मिक नेता और गृहणियों ने इस जुलूस में हिस्सा लिया। यह सी.ए.ए.-एन.आर.सी. के खि़लाफ़ हैदराबाद में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन था।

उत्तर प्रदेश में राजकीय हिंसा के शिकार बनाये गये लोगों के समर्थन में कई प्रदर्शन आयोजित किये गए। 7 जनवरी को मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिकों की रक्षा में एक प्रदर्शन आयोजित किया गया।

5 जनवरी की शाम को पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत में नकाबपोश गंुडों ने जे.एन.यू. के छात्रों पर जब कातिलाना हमला किया और हॉस्टल में तोड़-फोड़ की। तब देशभर में लोगों ने इसकी जोरदार निंदा की। देशभर के कई विश्वविद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित किये और जे.एन.यू. के छात्रों के समर्थन में बाहर निकल आये।

6 जनवरी को अहमदाबाद में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के बाहर, जे.एन.यू. के छात्रों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए, एक प्रदर्शन आयोजित किया गया। आई.आई.एम. अहमदाबाद, सी.ई.पी.पी. विश्वविद्यालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नेशनल इंस्टिट्यट ऑफ डिजाईन और गुजरात विद्यापीठ के छात्रों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। सैकड़ों नागरिक भी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए।

6 जनवरी को रांची में एक इमरजेंसी रैली का आयोजन किया गया। यह रैली “जे.एन.यू. के छात्रों और शिक्षकों पर राज्य-प्रायोजित हिंसा के खि़लाफ़ आवाज़ उठाओ” इस बैनर के तले आयोजित की गयी।

इसी तरह के प्रदर्शन मौलाना आज़ाद नेशनल ऊर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद और पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला में भी आयोजित किये गए। इन प्रदर्शनों में छात्र बैनर लिए हुए थे - “सी.ए.ए. और एन.आर.सी. का विरोध करो!” “जे.एन.यू. और जामिया के छात्र, हम तुम्हारे साथ हैं!”

जब जे.एन.यू. के छात्रों पर हमलों की ख़बर आई तो, बेंगलूरू और कोलकाता के आई.आई.एम., मुंबई, दिल्ली और चेन्नई के आई.आई.टी., टाटा इंस्ट्यिूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जाधवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता में छात्र सड़कों पर उतर आये।

हिन्दोस्तान के विश्वविद्यालयों में छात्रों पर हिंसा के खि़लाफ़ दुनियाभर में प्रदर्शन आयोजित किये गए। टोरोंटो में पीपल्स अलायन्स अगेंस्ट द इंडियन सिटीजनशिप एक्ट, ऑक्सफोर्ड यूनियन के छात्र, अमरीका में कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्र और लंदन में एस.ओ.ए.एस. विश्वविद्यालय के छात्र हिन्दोस्तान के छात्रों के साथ एकजुटता में सड़कों पर उतर आये।

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Jan 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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