अमरीका द्वारा ईरानी जनरल की हत्या : पश्चिम एशिया में बेहद ख़तरनाक परिस्थिति पैदा हो रही है

3 जनवरी, 2020 को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया कि अमरीकी सेना ने एक मिसाइल हमले में ईरान के मेजर-जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी है, जब उनका काफिला बगदाद अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट से निकल रहा था। जनरल सुलेमानी के साथ-साथ इराकी सेना के जनरल अबुद मेहदी अल-मुहांदिस सहित इराकी सेना के आठ अन्य अधिकारियों की भी इस हमले में हत्या की गयी। इराक की धरती पर ईरान और इराक के नेताओं की यह कायरतापूर्ण हत्या तमाम अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और कानूनों का घोर उल्लंघन है, क्योंकि अमरीका ने इराक या ईरान पर जंग का ऐलान नहीं किया है।

जनरल सुलेमानी की हत्या की ख़बर से पूरे ईरान में आक्रोश फैल गया और लोगों ने इसके खि़लाफ़ विशाल प्रदर्शन निकले। ईरान की सरकार ने सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया कि वह सही समय पर जनरल सुलेमानी की हत्या का बदला लेगी। जनरल सुलेमानी ईरान के सबसे जाने-माने जनरल में से एक थे और ईरान की कुद्स दस्ते के मुखिया थे। कुद्स दस्ता ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशन गाड्र्स कोर (आई.आर.जी.सी.) का हिस्सा है और इस दस्ते पर ईरान और उसके मित्र देशों को साम्राज्यवादी हमलों से हिफ़ाज़त करने की ज़िम्मेदारी है। हाल के वर्षों में ईरान ने इराक और सीरिया के साथ अपने राजनीतिक और सैन्य सहयोग को मजबूत किया है जिससे आई.एस.आई.एस. जैसे अमरीका-समर्थित आतंकवादी गुटों के हमलों से अपने देशों की संप्रभुता की हिफ़ाज़त कर पाए।

Philadelphia protest
Protest in Time Square, NY
Washington DC
Baghdad protest

8 जनवरी को ईरान की सरकार ने ऐलान किया कि उनके सशस्त्र बलों ने अमरीकी सेना के दो अड्डों पर सफलतापूर्वक हमले किये हैं और इन हमलों में अमरीकी सेना के 80 सैनिकों की मौत हो गयी है। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इन हमलों पर अपनी टिप्पणी देते हुए ऐलान किया कि “जब तक इस इलाके में ईरान हिंसा, अफरातफरी, नफ़रत और जंग फैलता रहेगा, तब तक मध्य-पूर्व एशिया में शांति क़ायम नहीं हो सकती। पूरी सभ्य दुनिया ने ईरान की हुकूमत को एक साफ और एकजुट चेतावनी देनी चाहिए कि ईरान द्वारा आतंक, हत्या और अफरातफरी के इस अभियान को और अधिक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम इस अभियान को हरगिज आगे नहीं बढ़ने देंगे।”

पश्चिम एशिया में शांति और देशों की संप्रभुता को ख़तरे के असली स्रोत के बारे में ट्रम्प सरासर झूठ बोल रहा है। पूरी दुनिया जानती है कि अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके मित्र-देशों ने इराक और लिबिया को बर्बाद किया और सीरिया में गृहयुद्ध चलाया। ईरान की सैनिक घेराबंदी और आर्थिक तौर से उसका गला घोटते हुए अमरीका ईरान की सरकार और उसके लोगों को घुटनों पर लाने की कोशिश कर रहा है।

पश्चिम एशिया के लोग जो अमरीका और उसके मित्र-देशों द्वारा फैलाई गयी हिंसा, अफरातफरी और जंग के शिकार हैं अब इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पश्चिम एशिया में शांति क़ायम करने के लिए सबसे जरूरी शर्त है, अमरीकी सैनिक बलों को इस इलाके से बाहर खदेड़ना। 

इराक के लोगों ने अमरीकी ड्रोन हमलों के शिकार लोगों की मौत का मातम मानते हुए अमरीका के खि़लाफ़ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग की। इराकी सरकार ने तीन-दिवसीय शोक का ऐलान किया है। लोगों ने अमरीकी और ब्रिटिश झंडों को जलाया और अमरीका द्वारा इराक की संप्रभुता के सरासर उल्लंघन की निंदा की। उन्होंने बगदाद में अमरीकी दूतावास पर प्रदर्शन आयोजित किये और उसकी दीवारों को अमरीका-विरोधी नारों से रंग दिया।

इराकी संसद ने अपने देश से अमरीकी सेना को खदेड़ने का फैसला किया। इराकी संसद का यह फैसला इराक के लोगों के बीच अमरीकी साम्राज्यवाद के प्रति उनकी नफ़रत और अपने देश की संप्रभुता की हिफ़ाज़त में अमरीकी सेना को खदेड़कर बाहर करने के दृढ़-संकल्प को दर्शाता है। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इराक के इस फैसले के जवाब में उस देश पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।

जनरल सुलेमानी की हत्या ने अमरीका और ईरान को जंग के एक क़दम और करीब लाकर खड़ा कर दिया है। ट्रम्प ने पश्चिम एशिया में हजारों अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही ट्रम्प ने ईरान के खि़लाफ़ और अधिक प्रतिबंधों का भी ऐलान किया है। बड़ी ही बेशर्मी के साथ ट्रम्प ने ऐलान किया कि “जो कोई शांति चाहता है, अमरीका उसे गले लगाने को तैयार है”। लेकिन इतिहास अमरीका के इस दावे को झुठलाता है।

इराक की धरती पर अमरीका द्वारा जनरल सुलेमानी की हत्या की दुनियाभर में ज़ोरदार निंदा हो रही है। यह कार्यवाही इराक की संप्रभुता का घोर उल्लंघन है। इसके अलावा यह ईरान के खि़लाफ़ सरासर भड़काऊ कार्यवाही है और इस पूरे इलाके में विनाशकारी जंग के ख़तरे को बढ़ाती है।

तेल संसाधनों से परिपूर्ण पश्चिमी एशिया इलाके पर अमरीका द्वारा अपना वर्चस्व स्थापित करने की योजना में ईरान एक बड़ी रुकावट है। इसलिए अमरीका ईरान को लगातार निशाना बना रहा है और उसके खि़लाफ़ एक के बाद दूसरी भड़काऊ कार्यवाहियां आयोजित कर रहा है।

अपनी संप्रभुता की हिफ़ाज़त में ईरान इन तमाम भड़काऊ कार्यवाहियों का सख्ती के साथ जवाब दे रहा है।

जून 2019 में ईरान की सेना ने, अमरीका द्वारा भेजे गए एक जासूसी ड्रोन को, होरमुज की खाड़ी में मार गिराया था। जुलाई 2019 में ईरान की सेना ने एक ब्रिटिश जहाज को जब्त कर लिया था, जो अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन कर रहा था।

पश्चिम एशिया में हिंसा के लिए ईरान पर इलजाम लगाने के लिए अमरीका ने हर प्रकार की चाल चली है। जब भी किसी तेल के टैंकर पर या अमरीका और उसके मित्र - देश जैसे साउदी अरब के सैनिक अड्डों पर कोई हमला होता है, तो बिना किसी सबूत के, अमरीका हमेशा ईरान के ऊपर झूठे इलजाम लगाने से बाज नहीं आता। यदि इतिहास देखा जाये, तो अमरीका जिस किसी देश को हिंसक देश करार देना चाहता है, वह उस देश के खि़लाफ़ भड़काऊ कार्यवाहियां आयोजित करता है। इसके मद्देनज़र यह संभव है कि इन सभी कार्यवाहियों के पीछे खुद अमरीका और उसके मित्र-देशों का ही हाथ है, और ये हमले इसलिए आयोजित किये जाते हैं, ताकि ईरान पर इलजाम लगाये जा सकें और अमरीका को ईरान पर हमला करने का बहाना मिल सके।

मई 2018 में जब से अमरीका ने ईरान के साथ किये गए एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते, जॉइंट कोम्प्रेहेंसिवे प्लान ऑफ एक्शन (जे.सी.पी.ओ.) से अलग होने का ऐलान किया है, उस समय से अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक घेराबंदी और आर्थिक नाकेबंदी को और तेज़ कर दिया है। जुलाई 2015 में अमरीका ने इंग्लैंड, चीन, फ्रांस, यूरोपीय संघ, रूस और जर्मनी के साथ मिलकर, ईरान के साथ यह समझौता किया था। इस समझौते के अनुसार, यह स्वीकार किया गया था कि ईरान पर लगाये गए सभी प्रतिबंधों को हटाया जायेगा और बदले में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोक देगा। लेकिन अमरीका ने अचानक एक-तरफा ऐलान किया कि वो इस समझौते को नहीं मानता और अगस्त 2018 में, उसने ईरान के खि़लाफ़ आर्थिक प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के आदेश जारी किए और अन्य देशों को भी इन प्रतिबंधों को स्वीकार करने के लिए दबाव डालने लगा और धमकी दी कि यदि कोई देश नहीं मानता है, तो वह अमरीका के साथ व्यापार नहीं कर सकता। मई 2019 में अमरीका ने ईरान के खि़लाफ़ नए हमलों की शुरुआत की। उस दिन अमरीका ने चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, हिन्दोस्तान और तुर्की को ईरान से तेल के आयात की जो छूट मिली हुई थी उसको भी रद्द करने का ऐलान किया। साथ-साथ अमरीका ने ईरान द्वारा निर्यात की जाने वाली सभी वस्तुओं जैसे लोहा, इस्पात, एल्यूमिनियम और ताम्बे आदि पर भी पाबंदी लगा दी।

इस तरह से आर्थिक तौर पर ईरान का गला घोटने की कार्यवाही के साथ अमरीका द्वारा सैनिक घेराबंदी और जंग की धमकी दी जा रही है। बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपनी आर्थिक और राजनीतिक प्रणाली चुनने के हर एक देश के संप्रभु अधिकार को त्यागने के लिए अमरीका ईरान पर लगातार दबाव डाल रहा है। ईरान पर हमला करने के लिए अमरीका पश्चिम एशिया के देशों का एक सैनिकी गठबंधन खड़ा कर रहा है।

पश्चिम एशिया में इस ख़तरनाक हालात के लिए अमरीका को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी पश्चिम एशिया से अमरीकी सेना को खदेड़ बाहर करने के ईरान और इराक की सरकारों के आह्वान का पूरा समर्थन करती है। इस इलाके में शांति सुनिश्चित करने के लिए यह बेहद ज़रूरी है।

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Jan 16-31 2020    World/Geopolitics    Rights     War & Peace     2020   

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