बढ़ता जन-विरोध और सरकार के झूठे प्रचार

नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) और नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) के खि़लाफ़ जन-विरोध का 8वां हफ्ता चल रहा है। देश-विदेश में ज्यादा से ज्यादा लोग इस जन-विरोध में शामिल हो रहे हैं, हालांकि प्रदर्शनकारियों के खि़लाफ़ तरह-तरह के झूठे प्रचार फैलाये जा रहे हैं, गाली-गलोच का प्रयोग किया जा रहा है, राजद्रोह का आरोप लगाया जा रहा है और पुलिस उन पर हिंसक हमले कर रही है।

New Delhi on 29 January 2020

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बैंगलुरु, लखनऊ, चेन्नई, इलाहाबाद, पटना, गुवाहाटी, भिवंडी, आजमगढ़, नागरकोइल व देश के अनेक और शहरों में लाखों-लाखों लोग सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों पर की गयी हिंसा के खि़लाफ़ देशभर में छात्र और शिक्षक आवाज़ उठा रहे हैं। अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड और अन्य देशों में हिन्दोस्तानी छात्रों ने अपने-अपने कैंपस में सी.ए.ए.-एन.आर.सी. के खि़लाफ़ और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिन्दोस्तानी सरकार के हिंसा प्रयोग के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन किये हैं।

केंद्र सरकार के मुख्य वक्ता बार-बार यह दोहरा रहे हैं कि उनका इरादा किसी हिन्दोस्तानी की नागरिकता छीनना नहीं है। परन्तु बहुत से विद्वानों, पत्रकारों और प्रगतिशील लोगों ने इस झूठ का पर्दाफाश करने की हिम्मत की है। उन्होंने समझाया है कि अगर सी.ए.ए.-एन.आर.सी. को एक साथ देखा जाये, तो उनका इरादा है लाखों-लाखों मुसलमानों की नागरिकता को छीनना। उन्होंने समझाया है कि असम में एन.आर.सी. लागू करने की वजह से, लाखों-लाखों ग़रीब लोग, जिनके पास लोई जायदाद या जन्मपत्री नहीं हैं, अपनी नागरिकता खो बैठे हैं। सी.ए.ए. के तहत, इस प्रकार के “अवैध आप्रवासी” हिन्दोस्तानी नागरिकता के लिए अर्जी भर सकेंगे, बशर्ते वे मुसलमान न हों।

दिल्ली में, शाहीन बाग में महिलाएं और नौजवान लगातार दिन-रात धरने पर बैठे हैं। हर रोज़ अलग-अलग धर्मों के तथा देश के अलग-अलग भागों से सैकड़ों लोग वहां जाते हैं। वे कसम खाते हैं कि धर्म के आधार पर हमें बांटने की सभी कोशिशों को हराएंगे और लोगों की एकता की हिफ़ाज़त करेंगे। शाहीन बाग से प्रेरित होकर, देश की कई और जगहों पर इसी प्रकार के धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं - जैसे कि लखनऊ के घंटाघर, कोलकाता के पार्क सर्कस, इलाहाबाद के रोशन बाग, उत्तराखंड के हल्द्वानी, मुंबई के नागपाड़ा, दिल्ली के निजामुद्दीन, आदि।

केंद्र सरकार सी.ए.ए.-एन.आर.सी. का विरोध करने वालों से किसी भी प्रकार की बातचीत करने से इनकार रही है। प्रमुख सरकारी वक्ता जानबूझकर यह झूठ फैला रहे हैं कि इन जन प्रदर्शनों के पीछे देश के दुश्मनों का हाथ है, पाकिस्तान का हाथ है।

दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए अपने प्रचार अभियान में भाजपा ने शाहीन बाग को मुख्य निशाना बनाया है। भाजपा के बड़े-बड़े नेता बार-बार यह झूठ दोहराते हैं कि इन जन प्रदर्शनों के पीछे “टुकड़े-टुकड़े गैंग”, यानी देश को तोड़ने वालों का हाथ है। वे मुसलमानों को “पाकिस्तानी एजेंट” बताकर, लोगों में मुसलमानों के प्रति डर फैला रहे हैं।

मुसलमानों के खि़लाफ़ यह प्रचार बिलकुल झूठा है। केंद्र सरकार को चलाने वाली पार्टी हिन्दोस्तानी लोगों की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही है। सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले लोग, चाहे किसी भी धर्म के हों, हमारी एकता को बरकरार रखने के लिए अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। केंद्र सरकार जन-विरोध को कुचलने के इरादे से बल प्रयोग करने की अपनी कोशिशों को जायज़ ठहराने के लिए, साम्प्रदायिक ज़हर फैला रही है।

इस ख़तरनाक हालत का मूल कारण यह है कि पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था लोगों की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकती है। पूंजीपति हुक्मरान वर्ग को अगुवाई देने वाले इजारेदार पूंजीवादी घराने मुसलमानों का हव्वा खड़ा करने के लिए भाजपा पर निर्भर कर रहे हैं, ताकि शोषित जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष न करे।

इन हालतों में लोगों को बहुत चौकन्ने रहना होगा। हमें लोगों को सांप्रदायिक तौर पर बांटने और सभी प्रकार के विरोध को अपराध करार देने के हुक्मरान वर्ग के प्रयासों का शिकार नहीं बन जाना चाहिए। देश के भविष्य के बारे में चिंतित सभी लोगों को हर इंसान के ज़मीर के अधिकार की हिफ़ाज़त में और संसद व केंद्र सरकार के नाजायज़ और ख़तरनाक फैसलों का विरोध करने के अधिकार की हिफ़ाज़त में उठ खड़ा होना होगा।

सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खि़लाफ़ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी

Ghantaghar Lucknow

17 जनवरी से महिलाओं ने लखनऊ के घंटाघर पर सी.ए.ए. के खि़लाफ़ दिन-रात का अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यूपी सरकार ने इस धरने को तोड़ने के लिये कई प्रयास किये हैं। उन्होंने आस-पास के शौचालयों को ताला लगा दिया । रात को उन्होंने कंबल व खाने का सामान छीन लिया। कई महिलाओं के खि़लाफ़ एफ.आई.आर. दर्ज़ हुई है। सरकार कोशिश कर रही है कि धरने के अंदर घुसपैठ की जाये और अराजकता फैलाकर इस पर हमला किया जाये। लेकिन लोगों ने इन प्रयासों को विफल कर दिया है

Bhiwandi Maharashtra

18 जनवरी को महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ एक विशाल प्रदर्शन हुआ। 2 लाख से अधिक लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। जिस स्टेडियम में रैली आयोजित की गई उसमें लोग सुबह से सैलाब की तरह लगातार आते रहे। लोक राज संगठन, भिवंडी जन संघर्ष समिति तथा अन्य जनसंगठनों, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों ने कई हफ्तों से काम करके इसका आयोजन किया था। 800 नवयुवकों ने रैली को सुचारू रूप से चलाने की पूरी ज़िम्मेदारी उठाई

Kolkata

20 जनवरी को कोलकाता में सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खि़लाफ़ सेंट पाल कथिड्रल से एक जुलूस निकाला गया जो गांधी मूर्ति तक गया (ऊपर व नीचे की छवियां)

Nagarcoil

27 जनवरी को कन्याकुमारी जिले के नागरकोईल कलेक्टरेट पर सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन (ऊपर व नीचे की छवियां)

Kolkata

Nagarcoil

IIT Bombay

26 जनवरी को आई.आई.टी. मुम्बई के छात्रों, शिक्षकों तथा पूर्व छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया

SC Lawyers

20 जनवरी को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया

Allahabad

12 जनवरी से महिलाओं ने इलाहाबाद के रोशनबाग में सी.ए.ए., एन.आर.सी.  के खि़लाफ़ अनिश्चितकालीन और दिन-रात का विरोध प्रर्दशन शुरू किया, उपरोक्त फोटो 15 जनवरी का है

Park Circus Kolkata

जे.एन.यू. के छात्रों पर हुये हमले के तुरंत बाद से 7 जनवरी को कोलकाता के पार्क सर्कस मैदान में महिलाओं ने सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खि़लाफ़ अनिश्चितकालीन दिन-रात का विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया

Haldwani Uttarakhand

23 जनवरी को उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में सी.ए.ए., एन.आर.सी. के विरोध में महिलाओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया।

Cotton Univ

22 जनवरी को गुवाहाटी के काॅटन विश्वविद्यालय के छात्रों की सी.ए.ए. के खि़लाफ़ भूख हड़ताल

NE Students

22 जनवरी को पूर्वोत्तर के विश्वविद्यालय और कालेज सी.ए.ए. के विरोध में पूरी तरह बंद रहे

Nagpur

17 जनवरी को महाराष्ट्र के नागपुर में सी.ए.ए., एन.आर.सी. के विरोध में महिलाओं ने संविधान चैक पर धरना दिया

YMCA ground Mumbai

17 जनवरी को मुम्बई के वाई.एम.सी.ए. मैदान में महिलाओं का सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन

Margao Goa

24 जनवरी को गोवा के मार्गाेवा शहर के लोहिया मैदान में सी.ए.ए., एन.आर.सी. के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन

 

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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