बजट 2020: लोगों को लूट कर पूंजीपतियों को मदद

बजट का एक केद्र बिंदु हिन्दोस्तान को हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीपतियों के लिए ”निवेशक अनुकूल“ बनाना था। इसका सीधा मतलब है कि मोदी सरकार पूंजीपतियों को अन्य देशों से अधिक मुनाफा कमाने, कम से कम कर देने, बिना रोक-टोक के पूंजी लाने और बाहर ले जाने में मदद करेगी।

इस दिशा में घोषित किये गए कुछ प्रस्ताव हैं -

  1. अभी तक एक नयी कंपनी को उसकी 25 करोड़ रुपये की कुल बिक्री तक तीन वर्षों के लिए मुनाफे पर 100 प्रतिशत कर रियायत मिलती थी। अब यह कर रियायत नयी कंपनियों को 100 करोड़ रुपये की कुल बिक्री तक मिलेगी।
  2. विदेशी सरकारों की मालिकी के फंडों को मूलभूत ढांचे और अन्य सूचित क्षेत्रों में 31 मार्च 2024 के पहले किये गए निवेश से ब्याज, लाभांश और बिक्री लाभ हुई आमदनी पर कोई कर नहीं देना होगा।
  3. कंपनियों के बौंड में निवेश पर लगी सीमा बढ़ाने की मांग विदेशी फंड करते आए हैं। वे हिन्दोस्तान में उनके देश की तुलना में अधिक ब्याज दर का लाभ उठाना चाहते हैं। अब यह सीमा कुल बौंड के 9 से 15 प्रतिशत बढ़ा दी गई है।
  4. शेयरधारकों को दिए जाने वाले लाभांश पर कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले कर को समाप्त करने की काफी लम्बे समय से चली आ रही मांग को बजट ने स्वीकार कर लिया। चूंकि कम्पनियां पहले से ही कर दे रही थीं, लाभांश प्राप्त करने वालों को कर नहीं देना पड़ता था। अब कंपनियों द्वारा दिए गए लाभांश पर वे कर नहीं देंगी इसलिए लाभांश प्राप्त करने वालों को उनकी आमदनी पर कर देना होगा। बजट में घोषित किया गया यह बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए खास तौर से लाभदायक है। सर्वप्रथम कंपनियों का कुल मुनाफा बढ़ने के कारण वे अब ज्यादा लाभांश दे पाएंगे। द्वितीय, विदेशी निवेशक आमतौर पर हिन्दोस्तान में उन देशों से निवेश करते हैं जहां कोई आयकर नहीं है या आयकर दर बहुत कम है। अतः उन्हें लाभांश आमदनी पर भी कोई कर नहीं देना पड़ेगा।
  5. सरकार ने सितम्बर 2019 में नयी उत्पादन कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत की रियायती कंपनी कर दर की घोषणा की थी। अब यह रियायती दर बिजली बनाने वाली कंपनियों को भी मिलेगी।
  6. अब उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की इजाज़त मिलेगी। ये संस्थाएं विदेशी सूत्रों से कर्ज़ भी ले सकेंगी। इसका मतलब है विदेशी विश्वविद्यालय अब हिन्दोस्तानी संस्थाओं में अपने सेंटर स्थापित कर सकेंगे और उसके लिए पूंजी ला सकेंगे। दूसरी तरफ, उच्च शिक्षा के आवंटन में बजट में नाममात्र की बढ़त की गई। उच्च शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा देने के पश्चात सरकार अब उच्च शिक्षा को विदेशी विश्वविद्यालयों को सौंप देना चाहती है।
  7. 2017-18 और 2019-20 के दौरान पूंजीपतियों द्वारा कर्जे़ वापिस करने से मना करने के कारण बैंकों द्वारा माफ़ किये गए कर्जों से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए सरकार ने 2.7 लाख करोड़ रुपये की सार्वजानिक धन बैंकों में लगाया है।

जब गांवों में खाद्य सुरक्षा की परिस्थिति और भी खराब हो रही है बजट ने खाद्य अनुदान में 69,000 करोड़ रुपये की बड़ी कटौती की है। 31 जनवरी 2020 को पेश की गई आर्थिक सर्वे ने तो यह भी सुझाव दिया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के अंतर्गत हिन्दोस्तान की 67 प्रतिशत जनसंख्या को दी जाने वाली सहायता को केवल 20 प्रतिशत को दिया जाये।

उर्वरक अनुदान को 2019-20 में 79,996 करोड़ रुपये से काट कर 2020-21 में 71,309 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

लोगों को दिए जा रहे विभिन अनुदानों में कटौती से बचे धन से ही पूंजीपतियों को ये सब रियायतें दी जा रही हैं।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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