बजट 2020: अधिक तेज गति से पूंजीपतियों के मुनाफे बढ़ाने के लिए निजीकरण

निजीकरण तथा विनिवेश बढ़ाने के उद्देश्य से बजट संयोजित किया गया है। जो निजीकरण योजनाएं घोषित की गयी हैं उन में से कुछ इस प्रकार है:

  1. 112 जिलों में जिला अस्पताल के साथ निजी मेडिकल कालेजों को सार्वजनिक-निजी भागिदारी (पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप - पी.पी.पी.) माॅडल पर स्थापित किये जाएंगे।
  2. पी.पी.पी. माॅडल के तहत 5 नये स्मार्ट शहर विकसित किये जाएंगे।
  3. पी.पी.पी. माॅडल के तहत कृषि उत्पादन के लिए गोदाम बनाये जाएंगे।
  4. कम से कम एक प्रमुख मौजूदा बंदरगाह का निजीकरण किया जाएगा।
  5. बड़े पैमाने पर बिजली वितरण का निजीकरण करने के लिए बिजली के स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इससे ग्राहकों को आपूर्तिकर्ता तथा दर को चुनना मुनासिब होगा।
  6. आई.डी.बी.आई. बैंक में केंद्र सरकार का 46 प्रतिशत बचा हिस्सा बेचा जाएगा। 2018-19 में सरकार ने इस बैंक में अपना 51 प्रतिशत हिस्सा बेच दिया था।
  7. आज भारतीय जीवन बीमा निगम (एल.आई.सी.) 100 प्रतिशत सरकार की मालिकी का है। उसे शेयर बाजार में रखकर उसका विनिवेश शुरू करने की योजना है। यह लोगों को चिंतित करने वाली बात है। लोगों की बचत के बहुत बड़े हिस्से का आज एल.आई.सी. संचालन तो करता ही है, उसके अलावा, वह सार्वजनिक तथा निजी कम्पनियों में भी सबसे बड़े निवेशकों में एक है। जब उसका निजीकरण हो जाएगा तब अपनी जीवन की बचत इस बीमा कम्पनी में रखने वाले हर इन्सान का भविष्य खतरे में आ जाएगा। एल.आई.सी. के निजीकरण का विरोध आल इंडिया इंश्योरेंस इम्प्लाइज एसोसिएशन तथा भाजपा से संलग्न भारतीय मजदूर संघ भी कर रहे हैं। 
  8. आई.डी.बी.आई. तथा एल.आई.सी. के शेयर्स बेचकर 90,000 करोड़ रुपये कमाने का सरकार का इरादा है। इसके अलावा, 1,20,000 करोड़ रुपये एयर इंडिया, बी.पी.सी.एल. तथा अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को बेच कर तथा शेयर्स के विनिवेश से जुटाए जाएंगे।
  9. भारतीय रेल के कदम-ब-कदम निजीकरण की गति बढ़ाई जा रही है। तेजस जैसी और निजी ट्रेनों को चलाया जाएगा। नष्ट होने वाले उत्पादों के परिवहन के लिए शीत किसान रेल को पी.पी.पी. माॅडल के तहत चलाया जाएगा। आने वाले तीन महीनों के अंदर नई दिल्ली स्टेशन तथा मुम्बई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल को पुनर्विकास के लिए निजी कम्पनियों को दिया जाएगा। 2020-21 के दौरान, 150 निजी ट्रेनों को चलाने के लिए बोलियां तय की जाएंगी।

निजीकरण से नौकरियां खोना अपेक्षित है और इसकी वजह से मजदूर उसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद निजीकरण किया जा रहा है। निजीकरण की वजह से अनेक सेवाएं उनके पहुंच के बाहर हो जाएंगी। इसके लिए ग्राहक भी उसका विरोध कर रहे हैं। मजदूर तथा लोग दोनों पूछ रहे हैं कि लोगों को पूछे बिना, सार्वजनिक राशि से स्थापित की गयी संपत्ति को निजी मुनाफों के लिए सौंपने का क्या सरकार को अधिकार है। वे मांग कर रहे हैं कि सब को मुनासिब दामों में आवश्यक सेवाओं को प्रदान करने का अपना मूलभूत उत्तरदायित्व सरकार पूरा करे। बिजली, पानी, सफाई, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, इत्यादि जैसी आवश्यक सेवाओं का निजीकरण होने के बाद बहुत सारे लोग इनसे वंचित हो जाएंगे क्योंकि उनकी कीमतें उनके लिए मुनासिब नहीं होंगी।

लोगों के विरोध के बावजूद, निजीकरण की गति पिछले कई सालों में बढ़ाई गयी है, क्योंकि पूंजीपतियों के मुनाफों पर दबाव है। उदारीकरण तथा निजीकरण द्वारा भूमंडलीकरण की नीति 1991 में लागू की गयी थी। तब से सार्वजनिक पैसे से बनायी गयी संपत्ति का निजीकरण जारी है। निजी मुनाफे के लिए राज्य ज्यादा नये-नये मार्ग खोल रहा है। रक्षा उत्पादन, पेट्रोलियम उत्पाद, बीमा, रेलवे, बिजली वितरण जैसे रणनैतिक महत्व के क्षेत्रों के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

लोगों की क्रयशक्ति कम होने की वजह से अपने मुनाफे बढ़ाने के लिए जब पूंजीपति उत्पादन करके ज्यादा बेच नहीं पाते हैं, तब मुनाफे बढ़ाने के लिए अंशतः या पूरे तरीके से सार्वजनिक कम्पनियां हथियाना एक आसान मार्ग है। बजट में निजीकरण तथा विनिवेश पर इसीलिए इतना जोर दिया गया है।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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