बजट 2020: कर वसूली और खर्च का लोक-विरोधी चरित्र

बजट दस्तावेजों का अध्ययन दिखाता है कि देश की कर व्यवस्था कितनी लोक विरोधी है और जिस तरह उसे खर्च किया जाता है वह उससे भी ज्यादा लोक-विरोधी है। लोगों द्वारा दिए गये कर के पैसे से ही उनको हर सरकारी सेवा दी जाती है। लोग जब भी कोई वस्तु या सेवा खरीदते हैं तो कर का भुगतान करते हैं। यह अप्रत्यक्ष कर दाम में निहित होता है। ये अप्रत्यक्ष कर हैं - जीएसटी, उत्पाद शुल्क, और सीमा शुल्क। आय कर एक प्रत्यक्ष कर है जो आमदनी के अनुसार होता है जबकि कम्पनियां उनके मुनाफे पर कंपनी कर देती हैं।

केंद्र सरकार के कर्ज़ सहित कुल आय का बंटवारा दिखाता है कि सब अप्रत्यक्ष कर मिलकर आय का 29 प्रतिशत (जीएसटी और अन्य कर - 18 प्रतिशत, उत्पाद शुल्क - 7 प्रतिशत, सीमा शुल्क - 4 प्रतिशत) अंश है जबकि आयकर का अंश केवल 17 प्रतिशत है। अतः कर भुगतान में मेहनतकशों का अमीरों से ज्यादा योगदान है। फिर भी साल दर साल आयकर घटाया जाता है और अप्रत्यक्ष कर बढाए जाते हैं। केंद्र सरकार ने केवल 2020-21 में लोगों से अतिरिक्त 80,000 करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली की योजना बनाई है।

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खर्च का बंटवारा उससे भी ज्यादा लोक-विरोधी है। सरकार के कुल खर्च का सब अनुदान मिलकर केवल 6 प्रतिशत अंश हैं परन्तु निरंतर उनको कम करने की मांग होती है।

उन विषयों पर खर्च जो समाज की खुशहाली में कोई योगदान नहीं करते हैं - ब्याज और रक्षा- उनका कुल खर्च में 26 प्रतिशत अंश है। ये दो अनुत्पादक खर्च कुल कर वसूली का 40 प्रतिशत ले जाते हैं।

रक्षा पर खर्च के अलावा बजट ने गृह मंत्रालय के बजट के अंतर्गत अर्ध-सैनिक बलों और पुलिस के लिए 1.05 लाख करोड़ रूपये का आवंटन किया है। रक्षा पर 4.7 लाख करोड़ रूपये के खर्च को मिला कर इस अनुत्पादक लेकिन दमनकारी विषय पर कुल खर्च 5.75 लाख करोड़ रुपये है। इसकी तुलना में 2020-21 के बजट में स्वास्थ्य के लिए 69,000 करोड़ रूपये, शिक्षा के लिए 99,000 करोड़ रूपये तथा महिला एवं शिशु विकास के लिए 30,000 करोड़ रूपये को ही आवंटन है।

लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देनी वाली ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ स्कीम के लिए आवंटन 280 करोड़ रुपये से घटा कर 220 करोड़ रुपये कर दिया गया है जबकि प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए बजट करीब 600 करोड़ रुपये है!

सबसे बड़ा परजीवी खर्च बैंकों और वित्तीय संस्थानों को दिए जाने वाले ब्याज पर होता है। 2020-21 में ब्याज पर खर्च 83,000 करोड़ रुपये बढ़ कर, 7,00,000 करोड़ रुपये होगा। ब्याज और पुराने कर्जों का भुगतान करने के लिए सरकार इन्हीं संस्थाओं से 8,10,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ लेगी। पुराने कर्जों का भुगतान करने के बाद नये कर्ज़ में से सिर्फ 5,36,000 करोड़ रुपये ही सरकार के हाथ में मिलेंगे।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ब्याज देने के लिए कर्ज़ लेने का चक्र चलता ही रहता है जबकि लोगों की मूलभूत जरूरतों पर खर्च साल दर साल कम होता जाता है।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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