पिछले 4 महीनों से वेतन न मिलने पर अमरावती के स्वास्थ्य और सफाई मज़दूरों ने किया विरोध प्रदर्शन

22 मई को आंध्र प्रदेश राजधानी राजधानी क्षेत्र अमरावती में ए.पी.सी.आर.डी.ए. (एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा अनुबंध पर रखे गए 550 स्वास्थ्य एवं सफाई मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने अपने पिछले 4 के महीने के बकाया वेतन की मांग उठाई।

22 मई की सुबह, पनुमाका पंचायत कार्यालय और राजधानी के कुछ अन्य इलाकों में मज़दूर ईकट्ठा हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने अपनी मांगों से लिखी हुई तख्तियां भी पकड़ी थीं। इतने लम्बे समय से वेतन न मिलने के कारण वे और उनके परिवार, खासकर इस कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, किन भयानक हालातों से गुजर रहे हैं इस पर उन्होंने रौशनी डाली।

Sanitation workers in Amaravati

यह स्वस्थ्य और सफाई मज़दूर राजधानी के आस-पास के 29 गांवों से हैं। ये भी वही काम करते हैं जो ग्राम पंचायत द्वारा नियुक्त किए गए सफाई मज़दूर करते हैं, फर्क केवल इतना है कि इनका वेतन सी.आर.डी.ए. देती है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान ये सभी कर्मचारी अपनी जान दाव पर लगाकर बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते रहे हैं और वे भी उनके निर्धारित समय से कई घंटे ज्यादा काम करते रहे हैं। न केवल उन्हें महामारी के दौरान अधिकारियों द्वारा कोई सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान किये गये हैं, बल्कि 4 महीने से उनका वेतन भी नहीं दिया गया है। आम तौर पर ये मज़दूर सभी कटौतियों के बाद महीने के 8,600 रुपये तक कमाते हैं। इस लॉकडाउन के दौरान हाथ में बिलकुल भी पैसा न होने के कारण इन मज़दूरों और उनके परिवारों को बहुत तकलीफ़ों का सामना करना पड रहा है।

यह सब उस क्रूर और दमनकारी राज्य का पर्दाफाश करता है जिसे अपने स्वास्थ्य और सफाई मज़दूरों के हालातों की कोई परवाह नहीं है और जो उन पर फूल बरसाने और ढोल पिटवाने जैसे नाटक करता है। 

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Jun 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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