जोखिमभरे कार्य में लगे स्वास्थ्य कर्मियों की काम के लिए सुरक्षित परिस्थिति की मांग की

मुंबई के के.ई.एम. अस्पताल के स्वास्थ्य मज़दूरों ने अपने साथी मज़दूर की मौत पर आक्रोश प्रकट किया

के.ई.एम. अस्पताल के मज़दूरों ने 26 मई को सुबह 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक अस्पताल में धरना प्रदर्शन किया। इन मज़दूरों ने अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अपने एक साथी की मौत हो जाने खि़लाफ़ धरना प्रदर्शन आयोजित किया।

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जिस मज़दूर की मौत हुई है वे 45 वर्ष के थे और 24 मई को मौत से पहले उन्हें बहुत बुखार था, जबान बेस्वाद हो गयी थी और शरीर में भारी दर्द था। ये मज़दूर कोविड-19 वार्ड में काम कर रहा था। उसके साथ काम कर रहे मज़दूरों के अनुसार 20 मई से ही उन्हें यह लक्षण थे, लेकिन न तो उनकी जांच की गयी और न ही उनको काम से छुट्टी दी गयी। 24 मई तक वे काम पर आते रहे। 24 मई को उनके परिवार वालें उनको के.ई.एम. अस्पताल लेकर आये, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी। उनकी मौत की संभावित वजह कोविड बताई गयी है। उनकी लाश को 26 मई को उनके परिजनों को सौंपा गया और उससे पहले दो दिन तक उनकी लाश मुर्दाघर में पड़ी रही।

धरना प्रदर्शन कर रहे कई मज़दूरों ने बताया कि अस्पताल के अधिकारी न तो उन्हें नियमित छुट्टियां दे रहे हैं और न ही जांच और उपचार की कोई सुविधा मुहैया करा रहे हैं। जबकि सभी मज़दूर अपनी ड्यूटी पूरी करने के लिए तमाम तरह का जोखिम उठाते हुए अधिक से अधिक घंटे काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य मज़दूरों ने अस्पताल में काम के बेहतर हालात मुहैया करने की भी मांग की।

दिल्ली की नर्सों ने पी.पी.ई. उपकरण का पुनः उपयोग करने के आदेश के खि़लाफ़ प्रदर्शन किया

नयी दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित एक निजी अस्पताल की नर्सों ने 26 मई को काम पर आने से इंकार कर दिया, जब उनकी एक साथी नर्स की कोविड-19 की वजह से मौत हो गयी। इस नर्स की उम्र 46 वर्ष थी और पिछले 10 वर्षों से अस्पताल के शिशु वार्ड में काम कर रही थी। हाल ही में उनको आई.सी.यू. वार्ड के काम पर तैनात किया गया था।

अस्पताल की नर्सों ने शिकायत की है कि पिछले 2 महीनों से अस्पताल के अधिकारी उन्हें एक ही पी.पी.ई. उपकरण का बार-बार इस्तेमाल करने को कह रहे हैं। अस्पताल के अधिकारियों ने उनकी शिकायतों को बेहरमी से कुचला और इससे होने वाले ख़तरे को गंभीरता से नहीं लिया। दिवंगत नर्स के साथी कर्मियों ने बताया कि एक सप्ताह पहले अपने काम के आखिरी दिन इस नर्स ने “नए पी.पी.ई. और मास्क” उपलब्ध न होने के बारे में नर्सिंग इन-चार्ज से बात की थी, लेकिन उनकी इस शिकायत को बेरहमी से ठुकरा दिया गया।

धरना कर रही नर्सों ने बताया कि 18 मई को अपनी सुबह की शिफ्ट पूरी करने के बाद दिवंगत नर्स ने बुखार, गले में खराश और बदन में दर्द की शिकायत की थी और रात की शिफ्ट के लिए काम पर आ नहीं पायी थी। लेकिन इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उसकी जांच करने के लिए कोई भी क़दम नहीं उठाए और न ही उनकी छुट्टी मंजूर की। 21 मई को जब उनको सांस लेने में तक़लीफ़ होने लगी तो उनको सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और 24 मई को कोविड-19 से उनकी मौत हो गई।

अस्पताल के डॉक्टरों ने भी इस बात पर आपत्ति जताई कि नर्सों को पी.पी.ई. उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने अस्पताल अधिकारियों को कई बार बताया कि नर्सों को अक्सर ऑपरेशन थिएटर के गाउन और धोये जाने वाले मास्क ही पहनने पड़ते हैं, जिससे उनको संक्रमण का ख़तरा बना रहता है।

पी.पी.ई. उपकरण के बिना काम करने को मजबूर सफाई मज़दूर की मौत

25 मई को दिल्ली के एम्स में काम कर रहे एक सफाई मज़दूर की कोविड-19 के चलते मौत हो गयी, क्योंकि उसे किसी भी तरह के सुरक्षा उपकरण के बगैर ही काम करना पड़ रहा था। ख़बरों के अनुसार एक सप्ताह पहले से उसमें कोविड-19 के लक्षण दिखाई दे रहे थे। अस्पताल में उसके खून की जांच की गयी और उसे घर में आराम करने की सलाह दी गयी। लेकिन कुछ ही दिन बाद उसके हालत बिगड़ने लगी। उसे इमरजेंसी वार्ड में रखा गया जहां उन्हें कोविड पॉजिटिव पाया गया और कुछ ही दिन बाद उसकी मौत हो गई।

एम्स में काम कर रहे सफाई मज़दूरों ने बताया है कि अपने काम के दौरान वे लगातार संक्रमण के संपर्क में आते रहते हैं और उन्हें डॉक्टरों और नर्सों की तरह जल्दी से जल्दी पी.पी.ई. उपकरण मुहैया कराये जाने चाहिए।

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Jun 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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