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  • लोगों के हाथों में फैसले लेने की ताकत के संघर्ष को आगे बढ़ाएं!

    संविधान, संसद में बहुमत से चुनी गयी सरकार को यह अधिकार देता है कि वह अपने फैसलों को सभी के ऊपर थोप सके। विडम्बना तो यह है कि लाखों लोग सड़कों पर इस लोक विरोधी कानून के खिलाफ अपना प्रत्यक्ष विरोध जता रहे है, पर उनके पास इस निर्णय को बदलने की कोई ताकत नहीं है। यह ऐसा गणतंत्र है जिसमें राज्य सरकारों और करोड़ों लोगों की मर्जी के खिलाफ, केंद्रीय सरकार संविधान के कुछ प्रावधानों के तहत, राज्य सरकारों पर अपने कानून थोप सकती है।

  • 24 जनवरी को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन.आई.ए.) को आदेश दिए कि वह भीमा कोरेगांव मामले की जाँच महाराष्ट्र पुलिस से छीनकर अपने हाथों में ले ले। केंद्र सरकार ने यह फैसला महाराष्ट्र के साथ बिना सलाह मशवरा या जानकारी दिए बगैर ले लिया है।
  • अर्थव्यवस्था में काफी मंदी के परिपेक्ष्य में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने वर्ष 2020-21 का बजट 1 फरवरी को पेश किया। साल दर साल पूंजीवादी नीतियां लागू करने से मेहनतकश और किसानों की क्रय शक्ति में गिरावट ही मंदी का कारण है।
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    बजट दस्तावेजों का अध्ययन दिखाता है कि देश की कर व्यवस्था कितनी लोक विरोधी है और जिस तरह उसे खर्च किया जाता है वह उससे भी ज्यादा लोक-विरोधी है। लोगों द्वारा दिए गये कर के पैसे से ही उनको हर सरकारी सेवा दी जाती है। लोग जब भी कोई वस्तु या सेवा खरीदते हैं तो कर का भुगतान करते हैं। यह अप्रत्यक्ष कर दाम में निहित होता है।

  • निजीकरण तथा विनिवेश बढ़ाने के उद्देश्य से बजट संयोजित किया गया है। जो निजीकरण योजनाएं घोषित की गयी हैं उन में से कुछ इस प्रकार है:

  • बजट का एक केद्र बिंदु हिन्दोस्तान को हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीपतियों के लिए ”निवेशक अनुकूल“ बनाना था। इसका सीधा मतलब है कि मोदी सरकार पूंजीपतियों को अन्य देशों से अधिक मुनाफा कमाने, कम से कम कर देने, बिना रोक-टोक के पूंजी लाने और बाहर ले जाने में मदद करेगी।
  • सुनिश्चित लाभकारी दाम पर सभी कृषि उत्पादों की खरीदी और खेती कर्जों को माफ करने की माँग किसान करते आयें हैं। किसान दामों में उतर-चड़ाव के कारण होने वाले नुकसान से संरक्षण चाहते हैं। सरकार उनको कह रही है कि पहले नुकसान सहन करो फिर उसकी भरपाई के लिए सरकार को अर्जी दो।
  • 4 Feb 2020, Koderma, Jharkhand

    सी.ए.ए.-एन.आर.सी. के खिलाफ देश भर में चल रहे विरोध के 10 सप्ताह 15 फरवरी को पूरे हो जायेंगे। महत्वपूर्ण यह है इन विरोधों में सैंकड़ों महिलाओं ने दिन ब दिन सक्रियता से भाग लिया है। न तो वे राजनीतिक नेताओं या उनके गुंडों की गालियों और धमकियों से और न ही पुलिस की लाठियों और अश्रु गैस से वे पीछे हटी हैं।

  • Bihar Sanitation workers

    पटना नगर निगम के मजदूर और सफाई कर्मचारी नौकरी को नियमित किए जाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। हाल में सरकार ने उनकी नौकरी को नियमित करने के बजाय उनको नौकरी से हटाने का निर्यण लिया है।

  • 2-Day bank strike

    इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आई.बी.ए.) द्वारा वेतन संशोधन की मांग को नामंजूरी देने के बाद, देश की सभी बैंक यूनियनें दो दिन की हड़ताल पर गयीं। 31 जनवरी और 1 फरवरी को बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सभी कर्मचारी नवम्बर 2017 से अपनी वेतन संशोधन की मांग को पूरी होने का इंतज़ार कर रहे हैं।

  • सांप्रदायिकता और बंटवारे की राजनीति को हराएं!

    लोगों की आवाज़ उठाने वाले उम्मीदवारों को जितायें!

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की दिल्ली इलाका समिति का बयान, 1 फरवरी, 2020

    दिल्ली के लगभग 1.46 करोड़ मतदाता 8 फरवरी, 2020 को अपने प्रतिनिधि चुनने वाले हैं। इन चुनावों में प्रमुख प्रतिस्पर्धी पार्टियां हैं - भाजपा जो इस समय केंद्र सरकार चला रही है, आम आदमी पार्टी (आप) जो इस समय दिल्ली सरकार चला रही है और कांग्रेस पार्टी। भाजपा ने जनता दल (यू) और लोक जन शक्ति पार्टी के साथ गठबंधन बनाया है जबकि कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन बनाया है। 70 सीटों की इस विधान सभा के चुनावों में कई कम्युनिस्ट उम्मीदवार, अन्य छोटी पार्टियों के उम्मीदवार तथा निर्दलीय उम्मीदवार खड़े हो रहे हैं।

  • लोगों के हाथ में राज्य सत्ता - यही आज वक्त की मांग है

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 23 जनवरी, 2020

    26 जनवरी के दिन, नयी दिल्ली के राजपथ पर टैकों और मिसाइल लांचरों की परेड होगी। राजधानी में, लड़ाकू विमान आसमान में दिखेंगे। हिन्दोस्तानी गणतंत्र की सैनिक शक्ति सारी दुनिया के सामने प्रदर्शित की जायेगी। हमारे शासक बड़े घमंड के साथ दावा करेंगे कि इस गणतंत्र में सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है।

    परन्तु कश्मीर से केरल तक, और महाराष्ट्र से मणिपुर तक, हरेक हिन्दोस्तानी यह जानता है कि इस गणतंत्र में सब कुछ बहुत बढ़िया नहीं चल रहा है।

  • New Delhi on 29 January 2020

    नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) और नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) के खि़लाफ़ जन-विरोध का 8वां हफ्ता चल रहा है। देश-विदेश में ज्यादा से ज्यादा लोग इस जन-विरोध में शामिल हो रहे हैं, हालांकि प्रदर्शनकारियों के खि़लाफ़ तरह-तरह के झूठे प्रचार फैलाये जा रहे हैं, गाली-गलोच का प्रयोग किया जा रहा है, राजद्रोह का आरोप लगाया जा रहा है और पुलिस उन पर हिंसक हमले कर रही है।

  • 20200127_Electricity workers Patna

    27 जनवरी को बिहार की राजधानी पटना में विद्युतकर्मियों ने विद्युत विभाग के निजीकरण के खि़लाफ़ विद्युत भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों के भारी विरोध के बावजूद, सरकार निजीकरण की नीति को लागू करने पर अमादा है।

  • Thiruvananthpuram

    8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द हड़ताल में देश की अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के मज़दूरों और मेहनतकश लोगों ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। यह आम हड़ताल सभी केंद्रीय यूनियनों, सर्व हिन्द फेडरेशनों और विभिन्न शहरों, उद्योगों और सेवा कंपनियों सहित ग्रामीण मज़दूरों को संगठित करने वाली सैकड़ों ट्रेड यूनियनों के बुलावे पर आयोजित की गयी थी और मज़दूरों ने इसे पूरा समर्थन देकर सफल बनाया।

  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 6 जनवरी, 2020

    कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 5 जनवरी की शाम को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों पर किये गए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करती है। लोहे के डंडों और लाठियों से लैस, नकाबपोश गुंडों ने परिसर में घुसकर, बड़ी बेरहमी से हिंसा और अराजकता फैलाई। इस पूर्व-नियोजित और राज्य द्वारा आयोजित हमले में 20 से अधिक छात्र-छात्राएं व महिला और पुरुष शिक्षक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

पार्टी के दस्तावेज

 कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के तीसरे महाअधिवेशन के दस्तावेज़मजदूरों और किसानों की हुकूमत और स्वेच्छा पर आधारित हिन्दोस्तानी संघ की ओर

यह ग्रंथ हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के तीसरे महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है। इसमें शामिल हैं-तीसरे महाअधिवेशन की कार्यवाहियों का सारांश और हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा पेश की गई केन्द्रीय समिति की रिपोर्ट जिस पर जनवरी 2005में हुये पार्टी के तीसरे महाअधिवेशन में चर्चा हुई थी तथा उसे अपनाया गया था।.

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पूंजीवाद का संकट और हिन्दोस्तानी राज्य का खतरनाक रास्तापूंजीवाद का संकट और हिन्दोस्तानी राज्य का खतरनाक रास्ता यह दिखाता है कि कम्युनिस्टों द्वारा इंकलाब के लिये तैयारी करना बेहद जरूरी है!

”हिन्दोस्तानी राज्य और क्रांति“ पर, नवंबर 2002 में हुई कानफरेंस में हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा दिया गया मुख्य भाषण

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बाधाओं को हटाकर एकता बनायें24-25 जनवरी, 1998 को नई दिल्ली में हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की विस्तृत परिपूर्ण सभा में महा सचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा पेश की गई ड्राफ़्ट रिपोर्ट.

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हिन्दोस्तान किस दिशा में?हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव लाल सिंह द्वारा पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से 23-24 दिसम्बर 1995 को नई दिल्ली में हुए पार्टी के तीसरे सलाहकार सम्मेलन में पेश की गयी रिपोर्ट है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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