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  • शुक्रवार, जून 5, 2020 - 16:16
    इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज़ के दिवालिया होने के दो साल बाद, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल, 2020 को एक आदेश पारित किया, जिसमें कंपनी के ऑडिटर्स - डेलॉइट हास्किन्स एंड सेल्स एंड बी.एस.आर. एंड एसोसिएट्स (के.पी.एम.जी. से जुड़ी एक कंपनी) पर केंद्र सरकार के प्रतिबंध को खारिज़ कर दिया। लेखा परीक्षकों पर कंपनी के प्रबंधन के साथ सहयोग करने, तथ्यों को छिपाने और वित्तीय वर्ष 2014-2018 की अवधि के खातों और वित्तीय विवरणों की पुस्तकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था।
  • शुक्रवार, जून 5, 2020 - 12:22

    25 मई, 2020 को इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आई.पी.एच.ए.), इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (आई.ए.पी.एस.एम.) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ एपिडेमियोलॉजिस्ट (आई.ए.ई.) के विशेषज्ञों ने कोविड-19 (कोविड महामारी) पर दूसरा संयुक्त बयान जारी किया।

    मज़दूर एकता लहर इस बयान को यहाँ प्रकाशित कर रहा है :

    इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आई.पी.एच.ए.),

  • बृहस्पतिवार, जून 4, 2020 - 15:21
    मज़दूर एकता लहर के 1 जून के अंक में प्रकाशित लेख “अमरीकी साम्राज्यवादी हस्तक्षेप का पुरजोर विरोध करें” के बारे में कुछ लिखना चाहता हूँ। यह लेख बहुत ही उचित, सही और समयानुसार है। लेख बखूबी बताता है कि कैसे अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अपने तंग हितों के लिए दुनिया के कई देशों को बर्बाद किया है और इसको अंजाम देने के लिए तमाम तरह के प्रयोग करता आया है जैसे कि शासन  परिवर्तन, लोकतंत्र की स्थापना, लोगों की आज़ादी के झूठे दावे देना, इत्यादि।
  • बृहस्पतिवार, जून 4, 2020 - 15:15

    चार सबसे बड़ी ट्रेड यूनियनों और कई स्थानीय अधिकारियों के बड़े पैमाने पर विरोध के बावजूद, 10 जून को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कोरोनोवायरस लॉकडाउन को ढीला करने की घोषणा की। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के सत्तारूढ़ मंत्रियों ने नई नीति को लागू करने से इनकार कर दिया है। सरकार ने अपने नारे को “घर पर रहें, एनएचएस की रक्षा करें और ज़िदगियां बचाएं” से बदलकर “सतर्क रहें, कोरोनावायरस को हरायें और ज़िन्दगियां बचाएं” कर दिया है।

  • सोमवार, जून 1, 2020 - 11:52

    अमरीका ने एक बार फिर अपनी प्रतिक्रियावादी जंगखोर प्रकृति को प्रकट किया है

    वेनेजुएला पर आक्रमण करने और मई की शुरुआत में, वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को या तो कैद करने या उनका क़त्ल करने में असफल अमरीकी साम्राज्यवादी साज़िश के बाद, 20 मई को वेनेजुएला की संप्रभुता पर इस जबरदस्त हमले पर चर्चा करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यू.एन.एस.सी.) की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। संयुक्त राष्ट्र में वेनेजुएला के स्थायी प्रतिनिधि ने विधानसभा के सामने स्पष्ट तथ्य और तर्क़ रखे और यह दिखाया कि अमरीका की यह नाकाम साज़िश, यू.एन.एस.सी. के कई प्रस्तावों का अपमान थी और इस तरह की कोशिशों की दुनिया के सभी लोगों को सख़्त निदा करनी चाहिए।

  • रविवार, मई 31, 2020 - 19:25

    अमरीकी दखलंदाज़ी का डटकर विरोध करें!

    27 मई को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुलेआम ऐलान किया कि "हमने दोनों हिन्दोस्तान और चीन को बता दिया है कि उनके बीच में इस समय चल रहे सीमा विवाद को लेकर, अमरीका मध्यस्तता करने को तैयार, राज़ी और सक्षम है"।  

    अमरीकी राष्ट्रपति की इन बातों से यह साफ़ पता चलता है कि हिन्दोस्तान और चीन के बीच में चल रहे सीमा विवाद का इस्तेमाल करके अमरीका इस इलाके में अपने हितों को बढ़ावा देना चाहता है। यह दोनों, हिन्दोस्तान और चीन के लिए तथा एशिया में शांति के लिए बहुत ख़तरनाक है। हिन्दोस्तान, चीन और इस इलाके के सभी देशों के लोगों को इसका डटकर विरोध करना चाहिए।

  • रविवार, मई 31, 2020 - 17:45
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    25 मई, 2020 को एक एफ्रो अमरीकी की हत्या के चार दिन बाद तक मिनियापोलिस और अमरीका के अन्य शहर जैसे कि न्यू यॉर्क, अल्बुकरकी, डेन्वर, शिकागो, लुइविल, लॉस एंजेलेस और ओकलैंड में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। पुलिस की हिरासत में एफ्रो-अमरीकी की क्रूर हत्या से पूरे अमरीका में लोग बहुत उत्तेजित हैं। लोग केवल मरनेवाले के लिए न्याय की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि उसके साथ पुलिस की बर्बरता, जिसके लिए वे पूरे अमरीका की पुलिस कुख्यात है, उसको पूरी तरह ख़त्म करने की भी मांग कर रहे हैं।

  • शनिवार, मई 30, 2020 - 11:24

    अमरीकी साम्राज्यवाद के दबाव और ब्लैकमेल के प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण

    24 मई को वेनेज़ुएला के नौसैनिक जहाज के संरक्षण में ईरान का एक तेल वाहक जहाज वेनेज़ुएला के तट पर पंहुचा। इस जहाज में वेनेज़ुएला की तेल रिफाइनरी के लिए 15 लाख बैरल कच्चा तेल लाया गया था। अगले कुछ ही दिनों में इस तरह के 4 और तेल वाहक जहाज ईरान से वेनेज़ुएला को आने वाले हैं।

  • शुक्रवार, मई 29, 2020 - 18:50
    मज़दूरों के विशाल विरोध प्रदर्शनों के चलते उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने औद्योगिक इकाइयों में दैनिक कार्य के समय को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे और कार्य के सप्ताह को 48 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे करने का अपना आदेश वापस ले लिया है। 
  • शुक्रवार, मई 29, 2020 - 18:40
    लाखों लोग सड़कों पर उतर पड़े थे, पैसों और काम के अभाव ने उन्हें पैदल चलने के लिए विवश कर दिया था। महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश की सीमाओं पर पचासों किलोमीटर लम्बा ट्रकों का जाम लगा जिसमे सिर्फ मज़दूर और उनके परिवार भरे थे। मज़दूर परिवारों की बड़ी तादाद अभी भी बाकी थी जिन्होंने सब्र का लिबास ओढ़ रखा था, उनकी आशाएं भारतीय रेल की ओर टिकी थीं। आखिरकार भारतीय रेल का मौन टूटा परन्तु मज़दूर परिवारों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
  • बृहस्पतिवार, मई 28, 2020 - 17:20
    KEM-hospital_nurses_protest

    के.ई.एम. अस्पताल के मज़दूरों ने 26 मई को सुबह 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक अस्पताल में धरना प्रदर्शन किया। इन मज़दूरों ने अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अपने एक साथी की मौत हो जाने खि़लाफ़ धरना प्रदर्शन आयोजित किया।

  • बृहस्पतिवार, मई 28, 2020 - 16:47
    Mughal Sarai

    26 मई को भारतीय रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (मुगल सराय) पर टिकट चेकिंग कर्मचारियों को रेल प्रशासन के खि़लाफ़ धरना देना पड़ा।

  • बृहस्पतिवार, मई 28, 2020 - 15:30
    Belgian_nurses_turn_their_backs_on_PM

    17 मई को बेल्जियम के डॉक्टरों और नर्सों ने, स्वास्थ्य-सेवाओं में अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ को काम में लगाये जाने के, बेल्जियम सरकार के फरमान के खि़लाफ़ एक मूक लेकिन शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन किया।

    बेल्जियम की प्रधानमंत्री सुश्री सोफी विल्मेस की ब्रसेल्स में सेंट पीटर अस्पताल की यात्रा के दौरान, डॉक्टरों और नर्सों ने अस्पताल के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दो पंक्तियों में खड़े होकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। और जैसे ही प्रधानमंत्री की कार अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास पहुंची, उनमें से प्रत्येक ने अपने स्थान में खड़े रहकर, उलट कर अपनी पीठ दिखाकर अपना विरोध प्रकट किया। इस मूक लेकिन बहुत ही जबरदस्त विरोध को व्यापक रूप से मीडिया में भी प्रसारित किया गया।

  • बुधवार, मई 27, 2020 - 17:49
    Defence Employees Against Corporatisation

    इस समय सरकार कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन के बहाने देश के श्रम कानूनों में पूंजीवादी संशोधन करके और मज़दूर वर्ग के अधिकारों को कुचलकर एक जबरदस्त बदलाव लागू करने की कोशिश कर रही है। इन हमलों के खि़लाफ़ अपना कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने धरना प्रदर्शन और अन्य विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं।

  • बुधवार, मई 27, 2020 - 13:46
    22 मई को देशभर में कोविड-19 के रोगियों का उपचार करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्य मज़दूरों ने केंद्र और कुछ राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा जारी परिवर्तित क्वारंटाइन दिशा-निर्देशों के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। हमें याद होगा की स्वस्थ्य मंत्रालय ने 15 मई को कोविड-19 के रोगियों का उपचार करने वाले स्वास्थ्य मज़दूरों के लिए क्वारंटाइन नियमों में बदलाव घोषित किये थे। बदले हुए नियमों के अनुसार कर्मचारियों को केवल तब क्वारंटाइन किया जाएगा जब वे किसी ”अति ख़तरे वाले रोगी के संपर्क“ में आएंगे या अगर उन कर्मचारियों में कोविड-19 के लक्षण पाए जाएंगे।  जबकि पहले के नियमों के अनुसार, सभी कर्मचारियों को 14 दिनों की कोविड ड्यूटी के बाद 14 दिन के लिए क्वारंटाइन करने की सलाह थी।
  • बुधवार, मई 27, 2020 - 13:37
    Sanitation workers in Amaravati

    22 मई को आंध्र प्रदेश राजधानी राजधानी क्षेत्र अमरावती में ए.पी.सी.आर.डी.ए. (एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा अनुबंध पर रखे गए 550 स्वास्थ्य एवं सफाई मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने अपने पिछले 4 के महीने के बकाया वेतन की मांग उठाई।

पार्टी के दस्तावेज

 कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के तीसरे महाअधिवेशन के दस्तावेज़मजदूरों और किसानों की हुकूमत और स्वेच्छा पर आधारित हिन्दोस्तानी संघ की ओर

यह ग्रंथ हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के तीसरे महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है। इसमें शामिल हैं-तीसरे महाअधिवेशन की कार्यवाहियों का सारांश और हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा पेश की गई केन्द्रीय समिति की रिपोर्ट जिस पर जनवरी 2005में हुये पार्टी के तीसरे महाअधिवेशन में चर्चा हुई थी तथा उसे अपनाया गया था।.

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पूंजीवाद का संकट और हिन्दोस्तानी राज्य का खतरनाक रास्तापूंजीवाद का संकट और हिन्दोस्तानी राज्य का खतरनाक रास्ता यह दिखाता है कि कम्युनिस्टों द्वारा इंकलाब के लिये तैयारी करना बेहद जरूरी है!

”हिन्दोस्तानी राज्य और क्रांति“ पर, नवंबर 2002 में हुई कानफरेंस में हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा दिया गया मुख्य भाषण

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बाधाओं को हटाकर एकता बनायें24-25 जनवरी, 1998 को नई दिल्ली में हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की विस्तृत परिपूर्ण सभा में महा सचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा पेश की गई ड्राफ़्ट रिपोर्ट.

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हिन्दोस्तान किस दिशा में?हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव लाल सिंह द्वारा पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से 23-24 दिसम्बर 1995 को नई दिल्ली में हुए पार्टी के तीसरे सलाहकार सम्मेलन में पेश की गयी रिपोर्ट है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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