3rd Congress Documents

Publication Details
Notes
3rdcongress-cover.jpg
  • Year: March 2005
  • Author: CGPI
  • Languages: English, Hindi, Tamil
  • Mediums: Print & PDF
  • Price: rs200 / USD $8
  • PDF_File.png PDF attached.
This document entitled Towards the Rule of Workers and Peasants and a Voluntary Indian Union contains the Report of the Central Committee presented by Comrade Lal Singh, General Secretary of the Communist Ghadar Party of India, which was discussed and adopted by the Third Congress of the Party, held in January 2005.

Description:

3rdcongress-cover.jpgThis document entitled Towards the Rule of Workers and Peasants and a Voluntary Indian Union contains the Report of the Central Committee presented by Comrade Lal Singh, General Secretary of the Communist Ghadar Party of India, which was discussed and adopted by the Third Congress of the Party, held in January 2005.

This document also includes the Constitution of the CGPI which was adopted at the Third Congress. Two brief notes entitled "About the Communist Ghadar Party of India" and "The Genesis of the Communist Ghadar Party of India" which were approved by the Congress are included for publication.

The Resolutions adopted at the Third Congress and the messages of greetings of sister parties who attended the Congress are also included in this publication. A summary of proceedings of the Third Congress has been included by decision of the Fourth Central Committee elected by the Third Congress.


This is the epoch of imperialism and proletarian revolution. However with the collapse of the Soviet Union, the world revolutionary process experienced a period of retreat. While the forces of retrogression are still on the offensive, the struggles of the working class and of the oppressed nations and peoples are growing more intense. The tide of revolution is poised to turn from ebb to flow.

In these conditions, the challenge facing the communist movement in India is to enable
the working class to emerge as a united force that forges a political front with the peasants
and all the oppressed. Such a united front must be organised to wrest power from the
hands of the exploiting minority and establish a voluntary Union of Workers’ and Peasants’
Republics.

Not to take on this challenge would result in the further worsening of the misery and
oppression of the masses and in the further exacerbation of the threat of war, fascism
and violence against the peoples.

The Communist Ghadar Party of India can and will take on this formidable challenge.

 

Cover photograph: May Day rally - Delhi 2004

 

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- Hindi

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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